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बूथ मैनेजमेंट, संगठन को मजबूत करेगा यूकेडी

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हल्द्वानी। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) अपने संगठन के विस्तार और बूथ मैनेजमेंट पर फोकस करेगा। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की थाह लेने के लिए शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि वह तीन-तीन दिन हर विधानसभा क्षेत्र में प्रवास करे।
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उत्तराखंड क्रांति दल की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति शनिवार को सर्किट हाउस में शुरू हो गई। पहले दिन संगठन और प्रमुख गतिविधियों पर चर्चा की गई। बैठक में विधानसभा चुनाव को फोकस करते हुए रणनीति बनाने पर विचार विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के राज में प्रदेश की जमीनों पर बाहरी लोगों का कब्जा हो गया है। अतिक्रमणकारियों को प्रश्रय दिया जा रहा है। जमीनों पर हो रहे कब्जे के खिलाफ पार्टी को संघर्ष करना होगा।
पहले दिन केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट, शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष हरीश पाठक, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल, पुष्पेश त्रिपाठी, केंद्रीय महामंत्री सुशील उनियाल, केंद्रीय उपाध्यक्ष भुवन जोशी, जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, महानगर अध्यक्ष रवि वाल्मीकि, जय प्रकाश उपाध्याय, शांत प्रसाद भट्ट, बलवंत डालाकोटी, तेज सिंह कार्की, आनंद असगोला, सरिता पुरोहित, बहादुर सिंह रावत आदि मौजूद थे।
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सत्ता है लक्ष्य, चाहे जैसे मिले: दिवाकर भट्ट
हल्द्वानी। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा बारी-बारी प्रदेश की सत्ता पर काबिज होते रहे हैं लेकिन दोनों ही दलों को न तो प्रदेश के विकास से मतलब है और ना ही वे प्रदेश में क्षेत्रीय दलों को उभरने देना चाहते हैं। उक्रांद ने तय किया है कि चाहे जैसे मिले...इस बार सत्ता हासिल करना लक्ष्य रहेगा।
कार्यसमिति में पहुंचे केंद्रीय अध्यक्ष भट्ट ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पार्टी को तीसरे विकल्प के रूप में कैसे जनता के बीच पेश किया जाएगा, इस पर मंथन किया जाएगा। उक्रांद के लोग आंदोलनकारी हैं, राजनीतिज्ञ नहीं। प्रदेश में पार्टी का जनाधार कम होने के पीछे पार्टी की कमजोरियां जरूर रहीं हैं लेकिन प्रदेश की जनता ने अभी तक अपने हितों को सुरक्षित रख पाने वाली पार्टी को पहचाना नहीं है। जनता भी बार-बार कांग्रेस, भाजपा को सत्ता देकर अपने साथ अन्याय कर रही है। जनता की उम्मीदों को बरकरार रखने के लिए अभी से जमीनी स्तर पर काम कर पार्टी चुनावों में मजबूत विकल्प बनकर सामने आएगी। अब तक पार्टी और उत्तराखंड आंदोलन का मजाक बनाने वाले लोग ही सत्ता पर काबिज होते रहे हैं। वह शहीदों के सपनों का राज्य नहीं बना सकते हैं।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश में बढ़ते जनाधार पर उन्होंने कहा कि आप ने दिल्ली में पर्वतीय जनता का अपमान किया है। दिल्ली में 43 लाख लोग उत्तराखंड के हैं लेकिन एक भी व्यक्ति को विधानसभा का टिकट नहीं दिया। प्रदेश के लोगों को आप का झंडा छूना ही नहीं चाहिए। आप दिल्ली में पहाड़ के लोगों का अपमान करती है वह किस मुंह से यहां आ रही है। जनता को आप पार्टी से सवाल करना चाहिए। अगर उक्रांद को सत्ता मिली तो प्रदेश ही नहीं बल्कि दिल्ली को भी निशुल्क पानी, बिजली देगी।
उक्रांद के तितर-बितर होने से पार्टी छोड़ी थी: हेमंत
हल्द्वानी। कांग्रेस छोड़ हाल में उक्रांद में शामिल हुए पार्टी के संस्थापक डीपी पंत के पौत्र हेमंत कोठारी का कहना है कि उनका पार्टी से लगाव बचपन से ही था। क्षेत्रीय पार्टियों के प्रति रुझान था लेकिन उक्रांद के तितर-बितर होने से उन्होंने कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा था।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें आईटी सेल का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया था। एक महीने पहले उन्होंने उक्रांद की सदस्यता ली है। उनके नाना डीडी पंत उक्रांद के संस्थापक रहे। डीडी पंत उनकी माता के चाचा थे। उनसे पहाड़ के प्रति बहुत कुछ सीखा था और क्षेत्रीय पार्टी के प्रति बेहद लगाव था। अब उक्रांद की मजबूती के लिए काम करेंगे।
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