रामनगर। मानसून सीजन में रामगंगा का कचरा रोकने के लिए नदी में बूम बैरियर बनाया जाएगा। मरचूला के पास इसके लिए तैयारी की जा रही है। ऐसा होने पर नदी के बहकर आने वाले कचरे को ढिकाला, कालागढ़ पहुंचने से पहले ही बैरियर से रोक लिया जाएगा।
बरसात में पहाड़ से प्लास्टिक की बोलतें सहित अन्य कचरा कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला, कालागढ़ डैम पहुंचता है। प्लास्टिक का यह कचरा पार्क प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। बरसात के बाद ढिकाला चौड़ से लेकर कालागढ़ डैम तक हर साल सीटीआर प्रशासन कचरे को साफ कराता है। अब इस समस्या का हल निकालते हुए सीटीआर की ओर से मरचूला के पास रामगंगा नदी में बूम बैरियर बनाने की तैयारी की जा रही है। बूम बैरियर के जरिए मरचूला के पास से ही कचरे को रोक लिया जाएगा।
ऐसे काम करेगा बूम बैरियर
सीटीआर के वार्डन अमित ग्वासीकोटी ने बताया कि बूम बैरियर में नदी के ऊपर एक छोर से दूसरे छोर तक तारों पर जाल को तिरछा बांधा जाता है। इससे नदी में पानी का बहाव सामान्य बना रहता है और कचरा जाल में एकत्र होता रहता है। एकत्र कचरे को स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से निकाला जाएगा। प्लास्टिक के अलावा अन्य कचरे से खाद बनाई जा सकती है।
इंजीनियरों की सलाह ली जा रही
पहाड़ से आनी वाली बाढ़ में लकड़ी के गिल्टे, बोल्डर बहकर आते हैं। इनसे बूम बैरियर खराब होने की संभावना है। लिहाजा इंजीनियरों की सलाह से बूम बैरियर बनाया जाएगा। सीटीआर निदेशक डाॅ. साकेत बडोला ने बताया कि इंजीनियरों की टीम से सलाह से बूम बैरियर बनाने की योजना पर कार्य चल रहा है।