ज्योलीकोट (नैनीताल)। मैं वीरभट्टी पुल हूं। जब ब्रिटिश हुकूमत चरम पर थी तब मेरा जन्म हुआ। अंग्रेजों ने बड़े लाड़ प्यार से मुझे पाला। तब मेरी बहुत खिदमत होती थी। हर साल मेरा सात रंगों से शृंगार होता था। यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को मैं पल भर बलियानाला पार करा देता था। अंग्रेजों के जाने के बाद सन 1965 में मेरा सामना भारतीय सेना से हुआ। सेना की बसों का कारवां दिन रात गुजरने लगा। मैंने अपने जीवन में पहले कभी इतनी भीड़भाड़ नहीं देखी थी। जब पता चला कि दुश्मन ने जंग कर रखी है तब मैं और मजबूती से सीना तान कर खड़ा हो गया।
धीरे-धीरे वक़्त आगे बढ़ता गया मेरी भी जवानी ढलने लगी। मेरे जैसे कई और पुलों ने जन्म लिया और लोगों ने मुझसे नजरें मिलाना कम कर दिया। अब तो दस साल में एक बार शृंगार होने लगा मेरा, वो भी कंजूसी से। मेरे शृंगार के बहाने अधिकारी अपना घर सजाने लगे। बुढ़ापे में मुझे बेसहारा छोड़ दिया गया। फिर भी मैंने ताकत नहीं खोई। गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक में आग लगने के बाद करीब 15 तेज विस्फोट मैंने झेले। जख्मी होने के बावजूद मैंने हार नहीं मानी। एक माह तक मैं बिना इलाज के तड़पता रहा। बेरुखी का आलम इतना रहा कि अनाड़ी डॉक्टरों से मेरा इलाज कराया गया। मेरे अंगों को एक-एक कर निकालकर कर जब मेरे ऊपर जेसीबी से प्रहार किए गए तो आखिरकार 26 अक्तूबर को मैंने दम तोड़ दिया। उत्तराखंड के ग्रामीणों और आसपास के निवासियों का प्रेम हमेशा याद रहेगा। अलविदा!
वैली ब्रिज बनाकर 20 दिन में शुरू होगा यातायात
ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित वीरभट्टी पुल के धंसने के 24 घंटे बाद प्रशासन की नींद टूटी। शुक्रवार दोपहर बाद एडीएम बीएल फिरमाल ने क्षतिग्रस्त वीरभट्टी पुल का निरीक्षण किया। उन्होंने एनएच के अधिकारियों को उक्त पुल के स्थान पर वैली ब्रिज बनाकर शीघ्र यातायात सुचारु कराने के निर्देश दिए। एसडीएम के अनुसार 20 दिन में ब्रिज तैयार कर 15 नवंबर तक इसके ऊपर से यातायात सुचारु करा दिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि उक्त पुल की नीलामी और नए पुल के निर्माण में तेजी लाई जाए। उधर, ग्रामीणों ने एसडीएम से पुल टूटने के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की।
25 सितंबर को गैस वाहन हादसे के बाद से बंद क्षतिग्रस्त वीरभट्टी पुल एनएच अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते मरम्मत के दौरान बृहस्पतिवार को धंस गया था। इससे शीघ्र यातायात सुचारू होने की बची-खुची उम्मीद खत्म हो गई थी। 1916 में बना ब्रिटिशकालीन यह पुल कुमाऊं की लाइफ लाइन माना जाता था। शुरूआत से लापरवाही का दंश झेल रहे पुल के पूरी तरह से टूट जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली थी। पूरे 24 घंटे बाद एडीएम शुक्रवार को दोपहर बाद वीरभट्टी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने एनएच के मुख्य अभियंता एजाज अहमद और एसई सीएम पांडे को दिन रात कार्य करवाकर वैली ब्रिज का निर्माण कराने, टूटे पुल की नीलामी कराने, नये पुल के निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इस दौरान जिला पंचायत सदस्य डॉ. हरीश बिष्ट, मुनीर आलम, पूर्व प्रधान हरगोविंद रावत, तारा सिंह, समाजिक कार्यकर्ता हरीश वरियाल, महेश जोशी, पुष्कर जोशी, इंदर नेगी, प्रकाश चंद्र आदि ने एडीएम फिरमाल से पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच कराने, बलियानाले में सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों की जांच, पुल के दोनों ओर 500 मीटर तक जेसीबी और अन्य मशीनों के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग की। निरीक्षण के दौरान एनएच के ईई महेंद्र कुमार, एई के एस मेहता, जेई दीपशिखा टम्टा भी उपस्थित थीं।
वैली ब्रिज बनाने की तैयारियां शुरू
ज्योलीकोट (नैनीताल)। एनएच के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त वीरभट्टी पुल के स्थान पर वैली ब्रिज के निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके लिए निर्माण सामग्री पहुंचनी शुरू हो गई है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि 20 दिन के भीतर वैैली ब्रिज तैयार कर यातायात सुचारु करा दिया जाएगा। मौके पर पैदल मार्ग का निर्माण भी जारी है।
वीरगति को प्राप्त हो चुके पुल को श्रद्धांजलि देने पहुंचे ग्रामीण
ज्योलीकोट (नैनीताल)। शतकवीर वीरभट्टी के ‘वीरगति’ को प्राप्त होने के बाद आसपास के ग्रामीणों को गहरा आघात लगा है। गुणवत्ता और मजबूती की मिसाल पुल के दर्दनाक अंत से लोग आहत हैं। लोगों ने बृहस्पतिवार को पुल के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते श्रद्धांजलि दी। पुल पर एकत्र जनसमूह ने फूल अर्पण कर और मोमबत्तियां जलाकर पुल को अविस्मरणीय बताया। लोगों का कहना था कि यदि इस ऐतिहासिक पुल पर समुचित ध्यान दिया जाता तो आज इसकी ये दुर्दशा नहीं होती। पुल के सबसे नजदीक के निवासी और बचपन से पुल को देखते आ रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता इंदर नेगी इस दौरान रो भी पड़े। श्रद्धांजलि सभा में मुनीर आलम, सतीश टम्टा, पूर्व प्रधान हरगोविंद रावत, तारा सिंह, पुष्कर जोशी, हरीश शास्त्री, प्रकाश चन्द्र, शरीफ समेत दो दर्जन से ज्यादा लोग मौजूद थे।
डबल लेन पुल बनाने में दो साल लगेंगे
ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग में वीरगति को प्राप्त ब्रिटिशकालीन पुल के स्थान पर एनएच के मानकों के अनुरूप डबल लेन का नया पुल बनेगा। इसमें कम से कम दो वर्ष का समय लगना तय है, तब तक वैली ब्रिज से ही काम चलाना होगा। एनएच के ईई महेंद्र कुमार ने बताया कि हालांकि ज्योलीकोट से घिंघारीखाल तक अधिकतर पुल, पुलियों का नवनिर्माण होना है जो कि एनएच के मानकों के अनुरूप क्लास ए, वर्तमान क्षमता से दोगुनी भारवहन के योग्य होंगे। इनका प्रस्ताव, आगणन मंत्रालय को काफी पहले भेज दिया गया है।
उसकी स्वीकृति का इंतजार है, लेकिन स्वीकृति के बाद भी वनभूमि, नापभूमि आदि प्रकरणों को निपटाने टेंडर प्रक्रिया में लगने वाले समय और निर्माण में कम से कम दो वर्ष का समय लग सकता है। इधर सीई ने बताया कि वैकल्पिक वैली ब्रिज के निर्माण में गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाएगा और कार्य के दौरान दो एसडीओ और एक जेई लगातार मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञ भी निगरानी करेंगे