नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनाई गई जैव फ्लॉक तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस तकनीक के माध्यम से उत्पादित मछलियों का विक्रय किया जा रहा है। भविष्य में उत्पादन और विक्रय को और अधिक बढ़ाने की भी योजना है।
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कुलपति प्रो. डीएस रावत ने बताया कि जैव फ्लॉक का उद्देश्य विलुप्त हो चुकी स्थानीय मछली स्नो ट्राउट को पुनर्जीवित करना, विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देना और उन्हें आत्मनिर्भरता बनाना है।