फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भुजियाघाट ने बनाई तेजपत्ता जोन के रूप में पहचान, दो सौ से अधिक परिवारों के रोजगार का जरिया बना तेजपत्ता

विज्ञापन
भुजियाघाट में तेजपत्ते की नर्सरी को सुधारते प्रगतिशील किसान गोविंद पलड़िया। - फोटो : NAINITAL
विज्ञापन
नैनीताल। एक समय था जब भीमताल ब्लाक के भुजियाघाट और इसके आसपास के ग्रामीण रोजगार के लिए तेजी से पलायन कर रहे थे लेकिन पिछले पिछले कुछ वर्षों के दौरान नई पीढ़ी के काश्तकारों की मेहनत ने इस क्षेत्र को तेजपत्ता उत्पादन में न केवल अग्रणी स्थान दिला दिया बल्कि इस क्षेत्र की पहचान ही तेजपत्ता जोन के रूप में होने लगी। इससे पलायन पर भी अंकुश लगा है।
विज्ञापन

रानीबाग से ऊपर की ओर ज्योलीकोट, मौरा, दोगड़ा व भुजियाघाट में वर्षों से तेजपत्ते का उत्पादन होता था लेकिन इसका व्यावसायिक लाभ नहीं मिल रहा था। नई पीढ़ी के काश्तकारों ने परंपरागत के बजाय इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया और नतीजे बेहद सुखद रहे। अब यहां दौ सौ से अधिक परिवार तेजपत्ता उत्पादन से रोजगार कमा रहे हैं।
भुजियाघाट में लगभग एक दशक पहले प्रगतिशील किसान गोविंद पलड़िया ने तेजपत्ते के बीज एकत्र कर 651 पौधों की पहली नर्सरी तैयार की लेकिन उन्हें इन पौधों के खरीददार नहीं मिले।
विज्ञापन

पलड़िया ने बताया कि संयोगवश उसी दौरान नैनीताल में कलेक्ट्रेट सभागार में तत्कालीन कमिश्नर राकेश शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें उन्हें भी बोलने का मौका मिला। उन्होंने तत्कालीन आयुक्त राकेश शर्मा और डीएम अमित घोष के समक्ष तेजपत्ते की पौध के न बिकने का मामला उठाया। डीएम ने अगले ही दिन भेषज संघ के अधिकारियों को गांव में भेज सारी पौध खरीदवा ली। तब से आज तक पलड़िया हर साल नर्सरी तैयार करते हैं और उनकी नर्सरी के पौधों की खूब मांग है। गोविंद को देख गांव के सैकड़ों लोग भी इस कारोबार से जुड़ गए। पलड़िया बताते हैं कि भुजियाघाट और इसके आसपास शुद्ध जैविक तेजपत्ते का उत्पादन होता है। इसकी पौध में न तो कोई रसायन का उपयोग होता है और न ही फर्टीलाइजर का। यह पूरी तरह गोबर की खाद में होता है।
मसाले के रूप में होता है उपयोग
नैनीताल। जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडे बताते हैं कि भुजियाघाट में पैदा होने वाला तेजपत्ता अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। यहां तेजपत्ते की सिनेमोमम मालाबाथरम प्रजाति का उत्पादन होता है। इसका उपयोग मुख्यत: मसाले के रूप में होता है।
50 हजार से अधिक पेड़
नैनीताल। अकेले भुजियाघाट और इसके आसपास के क्षेत्र में ही तेजपत्ते के पचास हजार से अधिक पेड़ मौजूद हैं जिनसे क्षेत्र का प्रति परिवार एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई करता है। कुछ बड़े काश्तकार साल में तीन लाख रुपये तक कमा लेते हैं।
छाल और पत्ते दोनों काम के
नैनीताल। बाजार में तेजपत्ते की छाल और पते दोनों की खूब मांग है। पलड़िया बताते हैं कि अभी इसकी छाल 15 से 20 रुपये प्रति किलो और पत्ते 50 से 55 रुपये किलो तक बिक रहे हैं। हालांकि जैविक होने के चलते इनके पत्तों की कीमत और ज्यादा मिलनी चाहिए।
बनता है रमन्ना, देते हैं ट्रांजिट शुल्क
नैनीताल। तेजपत्ता की बिक्री के लिए काश्तकारों को भेषज संघ से रमन्ना बनवाना होता है, जबकि वन विभाग की चौकी में काश्तकारों को ट्रांजिट शुल्क की रसीद कटानी होती है। उसके बाद इसे हल्द्वानी और रामनगर मंडी बिक्री के लिए ले जाया जाता है।
औषधीय गुणों से भरपूर है तेजपत्ता
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञानी डॉ. ललित तिवारी बताते हैं कि तेजपत्ते का इस्तेमाल ज्यादातर भारतीय पकवानों में मसाले के रूप में किया जाता है। इनमें भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। इसकी पत्तियों में कॉपर, पोटेशियम, कैल्शियम, मैगनीज, सेलेनियम और आयरन पाया जाता है।
विज्ञापन

तेजपत्ते के फायदे
1. पेट से जुड़ी कई समस्याओं में ये कारगर उपाय है। चाय में तेजपत्ते का इस्तेमाल करके कब्ज, एसिडिटी और मरोड़ जैसी समस्याओं से राहत पा सकते हैं।
2. तेजपत्ते का इस्तेमाल टाइप टू डायबिटीज में करना फायदेमंद होता है। यह ब्लड शुगर के लेवल को सामान्य बनाए रखता है।
3. रात को सोने से पहले तेजपत्ते का इस्तेमाल करना अच्छी नींद के लिए बहुत फायदेमंद है।
4. किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल फायदेमंद होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें