चुनाव नजदीक आने के साथ भीमताल विधानसभा से भाजपा में प्रत्याशी चयन को लेकर समीकरण बदल गए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत ने भीमताल से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
इससे पहले बचदा का यहां से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था और भाजपा र्हाईकमान भी इससे सहमति था। बचदा के हाथ पीछे खींचने के बाद अब पूर्व ब्लाक प्रमुख लाखन सिंह नेगी की दावेदारी से हलचल बढ़ गई है।
भीमताल के सियासी गणित ने सभी को उलझाया है। पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी के भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के बाद दोनों ही पार्टियां प्रत्याशी चयन को लेकर दुविधा में फंसी हैं।
उलझन सुलझाने के लिए ही भाजपा पार्टी हाईकमान ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत को भीमताल से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। बचदा पार्टी में सर्वमान्य और निर्विवाद नेता हैं। हाईकमान के फैसले से बाकी दावेदार अलग-थलग हो गए।
बचदा ने भीमताल से हाथ खींच लिए हैं और इसके बाद प्रत्याशी चयन को लेकर नए समीकरण बनने लगे हैं। भीमताल में करीब एक लाख मतदाताओं में करीब 70 फीसदी ठाकुर वोट हैं। जातीय समीकरण को देखते हुए ठाकुर दावेदार पूरी तरह जोर आजमाइश में लगे हैं।
पूर्व मंत्री गोविंद सिंह बिष्ट के बाद अब पूर्व ब्लाक प्रमुख लाखन सिंह नेगी के खुलकर मैदान में कूदने से सियासी हलचल बढ़ गई है। लाखन नेगी 2007 से राजनीति में सक्रिय हैं। लाखन नेगी पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी के काफी नजदीकी रहे हैं।
दान सिंह भंडारी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनके धुर राजनीतिक विरोधी हैं। भीमताल से जिलाध्यक्ष मनोज साह भी प्रबल दावेदार हैं।
भीमताल सीट से पार्टी ने चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। काफी मंथन के बाद भीमताल से मना कर दिया। भीमताल का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी होने से अब भागदौड़ करना संभव नहीं है। हां, मैदानी क्षेत्र से पार्टी प्रस्ताव रखेगी तो विचार किया जा सकता है। वैसे भी पार्टी ने मुझे काफी कुछ दिया और मैं खुश हूं।
- बची सिंह रावत, पूर्व केंद्रीय मंत्री