त्योहारों पर बाजार में सजकीं चमकदार और रंग-बिरंगी मिठाइयां लोगों को खूब लुभाती हैं, लेकिन इनकी चमक के पीछे मिलावट का खतरा भी छिपा हो सकता है। नकली खोया, सिंथेटिक दूध, घटिया तेल और हानिकारक रंगों से बने खाद्य पदार्थ सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय तक मिलावटी तेल व खाद्य पदार्थों का सेवन आंत, लीवर और किडनी को प्रभावित कर सकता है, वहीं कुछ हानिकारक रसायनों के संपर्क से कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में डॉक्टरों ने त्योहारों पर मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतने और गुणवत्ता का ध्यान रखने की सलाह दी है। बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने मिलावट से होने वाली बीमारियों से सजग रहने के लिए ऐसे वस्तुओं का उपयोग न करन की सलाह दी है।
फूड पॉइजनिंग: मिलावटी मिठाई, दूध, पनीर से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गैस। शुरुआती लक्षण - जी मिचलाना, पेट में ऐंठन, बुखार। लापरवाही पर डिहाइड्रेशन।
लीवर- किडनी फेल : मिठाइयों में अखाद्य रंग, यूरिया वाला दूध सीधे लीवर-किडनी पर अटैक करता है। लक्षण - थकान, भूख न लगना, पेशाब पीला। आगे पीलिया, हेपेटाइटिस, किडनी डैमेज, जो जानलेवा हो सकता है।
कैंसर का खतरा: लंबे समय तक मिलावटी तेल, नकली रंग और प्रिजर्वेटिव से टॉक्सिन जमा होते हैं, आंत, लीवर और पेट के कैंसर का खतरा।
हार्ट और शुगर : नकली घी, डालडा, ज्यादा चीनी से कोलेस्ट्रॉल, बीपी, शुगर और मोटापा। लक्षण - सीने में भारीपन, सांस फूलना। आगे हार्ट अटैक तक।
कैसे पहचानें
खोया ज्यादा सफेद और कड़ा हो, मिठाई में तेज केमिकल गंध, रंग हाथ में लगे तो मिलावट है। बहुत सस्ती मिठाई न लें।
बचाव के उपाय
भरोसेमंद दुकान से ही लें, ज्यादा रंग-बिरंगी मिठाई खान से बचें, घर की बनी मिठाई को प्राथमिकता दें, पैकेट पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण मार्क और एक्सपायरी जरूर देखें। कोई लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि मिलावटी खाना धीमा जहर है, थोड़ी सी सतर्कता बड़ी बीमारी से बचा सकती है।