खगोल विज्ञान के क्षेत्र में हो रही घटनाओं के क्रम में शुक्रवार का दिन खास रहा। पृथ्वी परिक्रमा के दौरान जूपिटर (बृहस्पति ग्रह) और सूर्य के बीच से होकर गुजरी। इसके चलते मध्यरात्रि में जूपिटर आकाश के मध्य में चमकदार नजर आया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी के जुपिटर व सूरज के बीच से गुजरने की घटना सामान्य है। जो प्रत्येक 13 माह में घटित होती है। इसे जूपिटर इन अपोजिट (बृहस्पति के विपरीत क्षेत्र में होने की घटना) कहते हैं। इसके बाद अगली घटना आठ मार्च 2016 को होगी। एरीज के वैज्ञानिक डा. शशिभूषण पांडे ने बताया कि बृहस्पति के 67 चंद्रमा अब तक खोजे जा चुके हैं। इसका द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 318 गुना अधिक है।
जिस प्रकार पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर घूमती है, उसी प्रकार बृहस्पति 9.9 घंटे में अपनी धुरी पर चक्कर पूरा करता है। 11.8 वर्ष में जूपिटर सूर्य का चक्कर पूरा करता है। सबसे नजदीक होने पर भी पृथ्वी और जुपिटर के बीच की दूरी 588 मिलियन किलोमीटर रहती है। बृहस्पति ग्रह सूर्य से पांचवां और हमारे सौरमंडल में सबसे बड़ा ग्रह है।