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विधानसभा की दावेदारी के लिए छात्रसंघ पर दाव

Thu, 28 Jul 2016 11:22 PM IST
निशांत खनी
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एमबीपीजी का छात्रसंघ चुनाव इस साल बेहद रोचक होगा। छात्रसंघ चुनाव न केवल 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस का रिहर्सल होगा बल्कि कई संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी का आकलन भी छात्रसंघ चुनाव तय कर देगा। विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे कई संभावित प्रत्याशियों ने युवा शक्ति को ताकत बनाने के लिए छात्रसंघ चुनाव पर दाव खेला है।
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विधानसभा के संभावित प्रत्याशी अपने खर्चे पर छात्रसंघ के कई पदों पर चुनाव लड़वा रहे हैं। इससे छात्रसंघ में प्रत्याशियों की संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक होगी। चुनाव जीतने के लिए बेतहाशा पैसा खर्च करने के साथ तमाम पैतरों की आजमाइश होगी। 

एमबी डिग्री कॉलेज छात्रसंघ का चुनाव राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम होता है। चुनाव भले ही छात्रसंघ का होता है, लेकिन बागडोर कॉलेज के बाहर बड़े दिग्गजों के हाथों में होती है। अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच सीधा मुकाबला होता है। दोनों संगठनों के प्रत्याशियों की हार-जीत पर भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दाव पर लगती है।
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इस साल छात्रसंघ चुनाव विधानसभा के संभावित प्रत्याशियों की हार-जीत ही नहीं बल्कि दावेदारी का भी रिहर्सल होगा। भाजपा की तरफ से अधिकतर नेता विधानसभा की तैयारी में जुटे हैं। लिहाजा, संभावित प्रत्याशी विधानसभा में अपनी दावेदारी को मजबूत बनाने के लिए युवा शक्ति का समर्थन लेने के लिए उन्हें कॉलेज में चुनाव लड़वाकर दाव खेल रहे हैं। 

कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव की पूरी रणनीति कॉलेज के बाहर तैयार हो रही है। इससे छात्रसंघ के प्रमुख पदों पर प्रत्याशियों की संख्या बढ़ गई है। प्रत्याशियों के होर्डिंग और पोस्टरों से शहर पटा है। अध्यक्ष पद पर ही चार प्रत्याशी अब तक सामने आ चुके हैं। सचिव पर तीन जबकि उप सचिव पर तो लंबी लाइन है। कोषाध्यक्ष और छात्रा उपाध्यक्षा पर भी प्रत्याशियों की लाइन है। अधिकतर छात्रसंघ प्रत्याशी सिर्फ विधानसभा चुनाव के दावेदारों के डमी हैं। 

25 लाख तक पहुंच जाती है अध्यक्ष पद की कुर्सी 

छात्रसंघ की निर्वाचित कार्यकारिणी का कार्यकाल एक साल होता है। अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी पानी की तरह पैसा बहाते हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने से अधिक खर्च अध्यक्ष पद के लिए होता है। अनुमान के मुताबिक अध्यक्ष पद का दावेदार कम से कम 25 लाख खर्च कर देता है। बाकी कार्यकारिणी के पदाधिकारी भी दो से पांच लाख तक खर्च कर देते हैं। 

प्रत्याशी हल्द्वानी और चुनाव करते हैं बाहरी 
छात्रसंघ चुनाव की बागडोर कॉलेज के बाहर बड़े दिग्गजों के हाथ में होने से अध्यक्ष पद का प्रत्याशी भी हल्द्वानी से ही होता है। जबकि, प्रत्याशी चयन में हल्द्वानी से बाहर के लोग भूमिका निभाते हैं। कॉलेज में औसतन एडमिशन 15 हजार तक पहुंचते हैं। हल्दचौड़, लालकुआं, बिंदुखत्ता, शांतिपुरी, पंतनगर, कालाढूंगी, कोटाबाग, चकलुवा, गौलापार, चोरगलिया, सितारगंज और बाजपुर के वोटर हार-जीत तय करते हैं, जबकि हल्द्वानी क्षेत्र के वोट आपस में विभाजित हो जाते हैं। 
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