हल्द्वानी। जंगलों के अंधाधुंध कटान, कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे गांव, कस्बे और शहर, अनियोजित विकास, भूस्खलन, चौड़ी पत्ती के वनों की कमी, बदलते मौसम चक्र की वजह से जलस्रोत सूखते जा रहे हैं। बारिश कम होने से नदियों का जलस्तर गिरने के साथ ही भूजल स्तर में कमी आ रही है। प्रदेश में वर्षा जल संग्रहण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) को अनिवार्य किया गया है, इसके बावजूद नए भवन निर्माण में शासनादेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। साल दर साल पानी की कमी हो रही है। जल संरक्षण को लेकर न तो सरकार संजीदा है और न ही लोग।
हल्द्वानी शहर में साल भर पानी का संकट बना रहता है। शहरवासियों को 50 साल पुरानी पेयजल योजना से ही पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जलसंस्थान के पास मौजूदा आबादी के लिए पर्याप्त पानी नहीं होने से भी किल्लत बनी है। पेयजल योजना के आखिरी छोर में बसे लोगों के कनेक्शनों में सालभर पेयजल आपूर्ति बाधित रहती है।
गर्मियों में किराए पर लिए जाते हैं करीब 25 टैंकर
हल्द्वानी। नलकूपों के खराब होने या पेयजल लाइनों की लीकेज के चलते तमाम इलाकों में सालभर पानी का संकट बना रहता है। जलसंस्थान के सात विभागीय टैंकरों से रोजाना प्रभावित इलाकों में पेयजल वितरित किया जाता है। गर्मियों में विभाग किराए पर करीब 22 से 24 टैंकरों से सप्लाई करता है।
जलसंस्थान की नहीं है कोई तैयारी
हल्द्वानी। जलसंस्थान ने गर्मियों में पेयजल किल्लत से निपटने के लिए अभी कार्ययोजना तैयार नहीं की है। जलसंस्थान के ईई संजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि गर्मियों में अतिरिक्त टैंकरों से पेयजल सप्लाई के लिए जीएम से अनुमति लेनी होती है। जल्द ही अनुमति लेकर टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
वर्षा जल संग्रहण टैंक बनेंगे
हल्द्वानी। जलसंस्थान के अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार सक्सेना का कहना है कि बेस अस्पताल, महिला अस्पताल, सुशीला तिवारी अस्पताल और भीमताल विकास भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनाने की योजना है। पहले चरण में इसके लिए 23 लाख रुपये अवमुक्त हुए हैं। प्रत्येक स्थान पर 50 हजार लीटर क्षमता के स्टोरेज टैंक बनाए जाएंगे। अप्रैल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पानी बचाने के सुझाव
-पेयजल के लिए कोई योजना बनाने से पहले ईआईए (एन्वायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट यानी पर्यावरणीय असर का अध्ययन) किया जाना चाहिए। चौड़ी पत्ती के जंगल विकसित करने होंगे और नियोजित विकास का खाका खींचना पड़ेगा। रेन वाटर हार्वेस्टिंग को हर हाल में अनिवार्य करना होगा।
- अजय रावत, पर्यावरणविद
पानी बचाने के लिए चौड़ी पत्ती के जंगल विकसित किए जाएं। पक्की कंक्रीट के स्थान पर पानी को जमीन के भीतर जाने की व्यवस्था बनाई जाए। शहर में वाटर रिचार्ज सिस्टम तैयार किया जाए।
-नीरज तिवारी, एई, जलसंस्थान
पर्वतीय क्षेत्रों में पानी की अधिक किल्लत है। पानी बचाने के लिए लोगों से अपील की जाएगी। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाने के लिए लोगों से अपील की जाएगी।
-डीके सिंह, महाप्रबंधक जलसंस्थान
यह है मौजूदा स्थिति
- शहर की आबादी: छह लाख
- मौजूद आबादी के लिए पानी चाहिए: 80 एमएलडी यानी 8 करोड़ लीटर।
- पेयजल की उपलब्धता 69 एमएलडी यानी 6.90 करोड़ लीटर।
- लीकेज आदि में बर्बाद हो रहा दो करोड़ लीटर प्रतिदिन।
- 62 नलकूपों से 34, गौला से 32 और शीतलाहाट प्लांट से मिलता है तीन एमएलडी पानी।
गौला का जलस्तर पहुंचा 66 क्यूसेक
हल्द्वानी। जलसंस्थान के सहायक अभियंता नीरज तिवारी ने बताया कि नलकूपों का जलस्तर 15 से 20 फीट तक गिर चुका है। एक साल पूर्व दमुवाढूंगा देवनगर नलकूप का जलस्तर 179 मीटर था जो इस बार 183 मीटर पहुंच गया है। चार मीटर यानी करीब 12-13 फीट नीच चला गया है। गौला का जलस्तर भी मात्र 66 क्यूसेक रह गया है, जो पिछले 12 वर्षों में मार्च महीने में सबसे कम आंका गया है।
सूख रहे जलस्रोतों ने बढ़ाई चिंता
भीमताल/गरमपानी (नैनीताल)। नौले (प्राकृतिक जलस्रोत) सूखने से भीमताल, ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ ब्लॉक की कई ग्रामसभाओं में ग्रामीणों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। बारिश न होने से बेतालघाट, गरमपानी, भवाली क्षेत्र में बहने वाली शिप्रा और कोसी नदी का जलस्तर गिर चुका है। नदी किनारे बसे गांवों के फसलों को भी सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। लोग हैंडपंपों का सहारा ले रहे हैं।
चंदन ने बना दिए 200 से अधिक चालखाल
भीमताल (नैनीताल)। ओखलकांडा क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल ने पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के लिए मुहिम चलाई है। वह जलस्रोतों, नदियों और गधेरों को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं। अब तक विभिन्न प्रजातियों के 40000 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। पतोली के तोक चामा क्षेत्र में जंगलों में 200 से अधिक चालखाल पोखर तैयार किए गए हैं। इनमें 8000 से 30000 लीटर तक पानी संरक्षित किया जा सकता है। 500 से अधिक खंतिया तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि युवाओं के सहयोग से वह निरंतर पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं।