खून की कमी को एनीमिया कहा जाता है, लेकिन अगर शरीर में ज्यादा हीमोग्लोबीन है तो भी सतर्क हो जाएं। यह भी एक बीमारी है। इसको नजरअंदाज करने से मुश्किल में पड़ सकते हैं।
सामान्य तौर पर पुरुष में हीमोग्लोबीन 15 से 16 और महिला में 12 से 15 मिलीग्राम तक ठीक माना जाता है। कई लोगों में हीमोग्लोबीन की मात्रा ज्यादा होती है और यह कई बार 17 से 22 मिलीग्राम तक पहुंच जाता है। डाक्टरों के अनुसार इसका मतलब शरीर में आक्सीजन की मात्रा कम होना है। शरीर में जब आक्सीजन कम होती है तो गुर्दे संकेत भेजते हैं, जिससे इरोथ्रिन पायोटिन नामक हारमोन बनता है और शरीर में हीमोग्लोबीन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। इसे सेकेंडरी पाली साइकिनिया बीमारी कहते हैं।
मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. एसआर सक्सेना कहते हैं कि सीओपीडी एक सांस की बीमारी होती है, जिसके साथ हीमोग्लोबिन ज्यादा बढ़ने की बीमारी काफी देखने को मिलती है। बात अगर सिर्फ हीमोग्लोबीन ज्यादा होने की करें तो ऐसे सिर्फ महीने में एक-दो ही रोगी ही आते हैं। ऐसे लोगों को एक बार अपने फेफड़े की जांच भी करवानी चाहिए।
फेफड़े रोग विशेषज्ञ डा. गौरव सिंघल कहते हैं कि सामान्य तौर पर 80 एमएम आक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए, लेकिन कई बार ज्यादा ऊंचाई पर रहने वाले लोग या सिगरेट पीने वाले या उस जगह पर रहना जहां चूल्हे का धुआं आदि ज्यादा होता है, उन लोगों में इस बीमारी के होने की आशंका ज्यादा होती है। वह कहते हैं कि सप्ताह में औसतन दो ऐसे रोगी आते हैं, जिनके इलाज के लिए कई बार खून भी निकालना पड़ता है। आक्सीजन भी देनी होती है। बीमारी के प्रति लापरवाही से हार्ट फेल होने जैसी दिक्कत सामने आ सकती है।