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बारगाहे-इलाही में मांगी खुशहाली 

Fri, 08 Jul 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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ईद - फोटो : अमर उजाला
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वाह! क्या खूब ईद की खुशी का मंजर। बृहस्पतिवार सुबह होते ही मुस्लिम इलाके रौनक से लबरेज दिखे। जब छोटे बच्चे अरबी चौला पहनकर घरों से निकले तो माहौल खुशनुमा हो गया। तयशुदा वक्त पर लोग ईद की नमाज के लिए ईदगाह की ओर चल दिए। इत्र की खुशबू से महकी ईदगाह में अकीदत के साथ नमाज अदा की गई। बारगाहे-इलाही में हजारों लोगों ने एक साथ सजदा किया और परवरदिगार से मुल्क में अमन, खुशहाली की दुआएं की गईं। 
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सुबह के आठ बजते ही लोग ईदगाह में जुटने शुरू हो गए थे। ईदगाह के आसपास की सभी दुकानें बंद हो गईं। ईदगाह रोड, लाइन नंबर एक और ताज चौराहे से ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। नौ बजने तक ईदगाह नमाजियों से भर गई। उसके बाद इंतजामिया ने सड़कों पर चटाई बिछानी शुरू कर दी। तयशुदा वक्त साढ़े नौ बजे मस्जिद बंजारान के पेश इमाम मौलाना अब्दुल बासित ने नमाज अदा कराई। नमाज से पहले लोगों को खिताब करते हुए उन्होंने ईद की हकीकत पर रोशनी डाली।

उन्होंने कहा कि ईद रोजेदारों को दिया गया खुदा का एक अजीम तोहफा है। इसकी लज्जत सिर्फ रोजेदार ही महसूस कर सकता है। नमाज के बाद दुआएं की गईं और खुत्बा पढ़ा गया। जामा मस्जिद में पेश इमाम मौलाना मुराद अली ने नमाज पढ़ाई। उन्होंने सभी को ईद की मुबारकबाद दी और रमजान की तरह ही साल भर पाबंदी से नमाज का एहतमाम करने की अपील की। इसके अलावा शहर की अन्य मस्जिदों में भी नमाज अदा की गई।
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मस्जिद कुरैशियान में मौलाना कमर अशरफ, मस्जिद चिराग अली शाह बाबा में मौलाना हयातुल्ला खान, गफ्फारान में मौलाना रईस, ताज मस्जिद में मौलाना फुरकान कासमी, बड़ी मस्जिद इंदिरा नगर में मौलाना सैय्यद इरफान रसूल, मदीना मस्जिद में मौलाना अब्दुल हक कासमी, मस्जिद उमर में मौलाना मुकीम कासमी, अमीर हम्जा में मुफ्ती लुकमान कासमी, मस्जिद आयशा में कारी आबिद, मस्जिद नमरा में मौलाना मोहम्मद अकरम, आस्ताना में हाफिज गुफरान, नूरी मस्जिद में मौलाना गुलाम हैदर, रजा में मौलाना शाहिद रजा, बिलाले मुस्तफा में कारी अहमद अली नूरी ने नमाज पढ़ाई। 

उलेमा की दो अपील
कोट 
जिस तरह रमजान में एक-दूसरे की मदद की, उसी तरह साल भर मोहब्बत, हमदर्दी के साथ का जज्बा पैदा करना है। रमजान तो ट्रेनिंग है, असल मकसद साल भर का हर दिन रमजान की तरह ही गुजारना है।
- मौलाना अब्दुल बासित, इमाम, ईदगाह हल्द्वानी। 
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कोट 
जिस तरह रमजान में इबादत की गई। तयशुदा वक्त पर सहरी कर रोजा रखा और इफ्तार तक परवरदिगार के हुक्म की पाबंदी की। नमाजों की अदायगी की। इसी तरह पूरे साल कुरान और शरीयत के हुक्म पर चलना है। इसका सभी लोग अहद (संकल्प) लें। 
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- मौलाना मुराद अली, पेश इमाम, जामा मस्जिद, हल्द्वानी। 
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