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निजीकरण के विरोध में बंद रहे बैंक

Fri, 29 Jul 2016 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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प्रदशऱ्न करते कऱ्र्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार की बैंक विरोध नीतियों के विरोध में शुक्रवार को सभी बैंक बंद रहे। हड़ताल के कारण हल्द्वानी में लगभग पांच सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। बैंकों में लगे चेकों का क्लीयरेंस भी नहीं हो सका। कर्मियों ने बैंक के निजीकरण का विरोध किया। एसबीआई की मुख्य शाखा के आगे एकत्र हो कर्मियों ने प्रदर्शन किया। 
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले शुक्रवार को सभी बैंक कर्मी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा के समक्ष एकत्र हुए। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में बैंक कर्मियों ने शुक्रवार को हड़ताल का एलान किया था।

यूनियन के पदाधिकारियों ने निजीकरण का विरोध किया और कहा कि बैंकों का विलय किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। कर्मियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान केएस बवेजा, केएस बसेड़ा, डीएस बिष्ट, अजय आर्य, पीएस खाती, केएस रावत, अभिनव असगोला, कुंदन सिंह, भूपेंद्र चंद्र, पीएस बिष्ट, चंदन बिष्ट आदि थे। 
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ये हैं मांगे 

बैंकों के निजीकरण और विलय का विरोध। 
बैंकों की पूंजी बढ़ाने के लिए निजी भागीदारी बढ़ाने का विरोध। 
बैंकों में विदेशी निवेश का विरोध। 
आरआरबी के निजीकरण का विरोध। 
निजी क्षेत्र के बैंकों को सरकारी क्षेत्र के बैंकों में विलय किया जाए। 
सभी कर्मियों को 01 अप्रैल 2010 से पेंशन दी जाए। 
खराब ऋणों की वसूली के लिए कारगर कदम उठाएं जाएं। 
एनपीए के लिए बैंक प्रबंधन का उत्तरदायित्व निश्चित किया जाए। 
पीसीजी का विरोध। 
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