बनभूलपुरा की अपनी अलग एक रोचक दुनिया है। रीति-रिवाज, रहन-सहन और खानपान ही नहीं, इनकी बोली-भाषा भी अलग है। पूरा हल्द्वानी शहर जब रात में गहरी नींद सो रहा होता है, यहां की गलियां गुलजार रहती हैं। मुजाहिद चौक की चौपाल में चाय की चुस्की के साथ रात ढाई से तीन बजे तक चकल्लस चलती और हर उम्र की बैठकी होती है।
लाइन नंबर आठ में भी खाने पीने के होटल-ढाबे से लेकर चाय और फास्ट फूड की दुकानों में रौनक रहती है। जवान और बूढे़ हमउम्रों के साथ दुकानों के बाहर जगह-जगह घेरा डालकर चर्चा में मशगूल रहते हैं। चर्चा में हल्द्वानी से लेकर दीन दुनिया के ताजे घटनाक्रम शामिल होते हैं।
आजकल चौपाल से लेकर हर बैठकी में हल्द्वानी के चुनावी समीकरण और जम्मू के उड़ी में आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ से होने वाली जवाबी कार्रवाई लोगों की जुबान पर है।
बनभूलपुरा मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां 7 वार्ड और 19 गलियां हैं। अधिकांश लोग मेहनतकश हैं। लाइन नंबर 17 में मुजाहिद चौक और लाइन नंबर आठ का बाजार दिन-रात खुला रहता है। हल्द्वानी शहर के लोग रात 11 बजे बाद नींद के आगोश में खो जाते हैं, वहीं बनभूलपुरा के लोग बाजार की रौनक बढ़ाने घरों से निकल आते हैं।
मुजाहिद चौक में दुकानों के बाहर तख्त और बेंच लगे हैं। 11 बजने के साथ ही तख्त भरने लगती हैं। तख्त पर बैठने की जगह नहीं मिलने पर कुछ लोग सड़क के दोनों तरफ खड़ी ठेलियों पर बैठ जाते हैं। कुछ लोग जमीन पर ही बैठकी जमा लेते हैं।
बैठकी का दौर रात तीन बजे तक चलता है। तख्त के चारों तरफ खड़े लोगों का घेरा रहता है और चर्चा कान लगाकर सुनते हैं। खड़े लोग तख्त से किसी के उठने का इंतजार करते हैं ताकि बैठने की जगह उन्हें मिल जाए। देर रात तक चौपाल में आने और जाने का सिलसिला चलता रहता है, लेकिन चौपाल की रौनक बरकरार रहती है।
लाइन नंबर आठ में भी काफी चहल पहल होती है। दुकानों के बाहर कुर्सियां पड़ी रहती हैं। रात गहराने के साथ बैठकी में लोग बढ़ने लगते हैं। कुर्सियां खिसकते खिसकते बीच सड़क तक पहुंच जाती हैं। बूढ़े और जवान अपनी अपनी बातों में व्यस्त रहते हैं।
हर घंटे चाय का आर्डर होता है। चाय की चुस्की के साथ मुंह का स्वाद बदलने के लिए कभी फास्ट फूड तो भूख लगने पर बिरयानी भी आर्डर होती है। दौर घंटों तक चलता है। अधिकतर बैठकी में आजकल हल्द्वानी के चुनावी समीकरण की चकल्लस हावी है।