हल्द्वानी। देश-दुनिया में विख्यात कृषि वैज्ञानिक और इस समय पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार सौंप कर ‘अंतर्धान’ हुए डा. मंगला राय के कार्यकाल में पंतनगर विश्वविद्यालय में चयन प्रक्रिया में जिस तरह की मनमानी हुई, उसके उदाहरण अब सामने आने लगे हैं। एक मामला अधिष्ठाता कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय से जुड़ा है।
इस उच्च पद पर चहेते की नियुक्ति के लिए स्क्रीनिंग कमेटी ने नंबरों में हेराफेरी कर योग्य व्यक्ति को अयोग्य घोषित कर दिया। इस कारनामे का खुलासा जांच समिति की रिपोर्ट में हुआ तो कुलपति ने जांच समिति की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए। पूरा मामला अब कुलाधिपति के दरबार में हैं मगर डा. राय का कद जांच पर भारी पड़ता दिख रहा है।
अधिष्ठाता कृषि व्यवसाय प्रबंधन महाविद्यालय पद के लिए योग्य व्यक्ति को चयनित करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाई गई। डीन्स कमेटी ने चयन के लिए प्रारूप तैयार किया। मुख्य कार्मिक अधिकारी कार्यालय से 27 अप्रैल 2015 तक इस प्रक्रिया के लिए आवेदन मांगे थे। 15 जून 2015 को साक्षात्कार हुए।
छह अभ्यर्थियों में से चार को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया और तीन अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिए। स्क्रीनिंग कमेटी ने डा. आरएस जादौन को उनकी योग्यता से कम 81 अंक दिए, जबकि डा. देवेंद्र कुमार को उनकी योग्यता से अधिक 85.5 अंक देकर चयनित किया। अंकों की यह हेराफेरी जांच समिति की रिपोर्ट में उजागर हुई।
डा. कुमार के आवेदन पर हाथ से चीफ वार्डन लिखकर नंबर दिए गए। डा. कुमार के पास अवार्ड न होने पर भी पूरे नंबर मिले। सीवी में डा. देवेंद्र कुमार के पास एमटेक में डिवीजन न होने के बाद भी पूरे नंबर दिए गए। डा. जादौन के पास अवार्ड ज्यादा होने के बावजूद नंबर कम दिए गए। पूरा मामला कुलाधिपति के पास पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई।
जांच का आदेश प्रबंध परिषद ने दिया। दो सदस्यीय जांच समिति ने स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा दिए गए अंकों में गड़बड़ी पाई। समिति के अनुसार डा. जादौन को 86.5 और डा. कुमार के 80.5 अंक होने चाहिए थे। डा. कुमार को 80.5 की जगह पर 85.5 अंक दे दिए गए।
गड़बड़ी मिलने पर डा. कुमार को तो हटा दिया गया मगर नंबर एक पर होने के बावजूद डा. जादौन को न नियुक्त कर तीसरे व्यक्ति की उक्त पद पर नियुक्ति कर दी गई। पूरे प्रकरण में खास बात ये रही कुलपति डा. मंगला राय ने एक जगह पर तो डीन्स कमेटी के प्रारूप पर सवाल खड़े किए तो कुलाधिपति को भेजी रिपोर्ट में डीन्स/स्क्रीनिंग कमेटी के प्रारूप को उचित एवं पारदर्शी प्रक्रिया बताया।
अपने निर्णय को सही ठहराने के लिए डा. राय ने विरोधाभासी बातें लिखीं। सवाल यह उठता है कि स्क्रीनिंग कमेटी ने आखिर किसके दबाव में ऐसा किया। कुलपति के खिलाफ शिकायत होने के बावजूद अभी तक उच्चस्तर से कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ित को भी न्याय नहीं मिला है।
पूरा प्रकरण कुलाधिपति के पास लंबित है। कुलाधिपति कार्यालय यानी राजभवन के एक अधिकारी की टिप्पणी से साफ झलकता है कि इस मामले में धांधली होने की बात स्वीकारते हुए डा. जादौन की नियुक्ति की संस्तुति हुई फिर भी ऐसा नहीं हुआ। क्यों? इसका जवाब कुलाधिपति कार्यालय ही जाने।
इस मामले का खुलासा आरटीआई में हुआ है। पूरे प्रकरण पर डा. मंगला राय से बात करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। डा. राय ने व्हाट्सएप पर किए गए मैसेज का भी जवाब नहीं दिया।