नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी के ग्राम जखोल मोरी के पौराणिक सोमेश्वर महादेव मंदिर की मरम्मत हंस फाउंडेशन की ओर से किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 16 मई को होगी। कोर्ट ने शासन की ओर से की जा रही जांच पर पूर्व में लगी रोक को आगे बढ़ा दी है। पूर्व में मंदिर समिति के एक सदस्य की ओर से लगी रोक को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रार्थनपत्र पेश किया गया। इसमें कहा गया था कि मंदिर की स्थिति जीर्णशीर्ण हो गई है। यह कभी भी धराशायी हो सकता है। इसलिए इस पर लगी रोक को हटाया जाए। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
सोमेश्वर महादेव मंदिर समिति के संयुक्त सचिव रामलाल विश्वकर्मा की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि जखोल (मोरी) स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर सदियों पुराना है। यहां पांडवों द्वारा पूजा किए जाने की भी मान्यता है। 1861 में यहां आकर्षक नक्काशीयुक्त मूर्ति स्थापित हुई। इस मंदिर में आसपास के 22 गांवों के ग्रामीणों सहित दूरदराज के लोगों की अटूट आस्था है। स्थानीय लोग इस मंदिर की मरम्मत पुरातत्व विभाग से कराने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मन्दिर का मरम्मत कार्य स्थानीय देव शिल्पियों द्वारा होगा लेकिन हंस फाउंडेशन द्वारा बाहर के मिस्त्रियों से यह काम कराना चाहता है। मंदिर समिति ने इस संबंध में हंस फाउंडेशन के समक्ष विरोध दर्ज किया था। संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज को भी प्रत्यावेदन दिया। उन्होंने इस मामले की जांच के आदेश विभाग के सचिव को दिए। जनहित याचिका में कहा गया कि इस पर रोक लगाई जाए।