नैनीताल के मल्लीताल स्थित पिलग्रिम लॉज के आउट हाउस में टिनशेड में रहने वाली भागीरथी बिष्ट का जीवन काफी संघर्षशील रहा है। पति के फालिज पड़ने के बाद अपनी पुत्री को लकड़ी बीनकर पढ़ाया। बेटी को बाबू बनाने के बाद भी आज वह लकड़ी बीनती है और खाली समय में कागज के लिफाफे बनाकर अपना गुजर बसर करने को मजबूर है।
भागीरथी रोते हुए अपने संघर्षशील जीवन के बारे में बताती हैं कि उनके पति रेस्टोरेंट में काम करते थे। अचानक फालिज पड़ने के बाद वह बिस्तर पर पड़ गए। भागीरथी ने बताया कि उस समय उनका बेटा तीन साल और बेटी छह माह की थी।
उन्होंने लकड़ी बीनकर परिवार पाला और बच्चों की शिक्षा में व्यवधान नहीं आने दिया। पुत्री गीतांजलि ने भी दिन-रात मेहनत की और 2006 में हाइस्कूल परीक्षा में 81.5 फीसदी अंक हासिल कर जिले में छठा और राज्य में 24वां पाया। इंटर में 80 फीसदी अंक व राज्य में 43वां स्थान हासिल किया था।
पति की मृत्यु के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। कहा कि जब तक सांस है तब तक संघर्ष करती रहूंगी। आज भी वह लकड़ी बीनकर व कागजों के लिफाफे बनाकर अपने ऊपर गर्व महसूस करती है। भागीरथी ने बताया कि सरकारी विभाग में संविदा में कार्यरत बेटे की शादी कराने के बाद वह अपनी पत्नी को लेकर किराए के मकान में रह रहा है।
जबकि पुत्री गीतांजलि मल्लीताल स्थित पोस्ट ऑफिस में बतौर पोस्टल असिस्टेंट पद पर कार्यरत है। उनकी पुत्री गीतांजलि आफिस के बाद घर में उनकी देखरेख करती है और साथ में रह रही है। बता दें कि लेकसिटी वेलफेयर क्लब द्वारा रविवार को मातृ दिवस पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा।