नैनीताल। सरोवर नगरी में अधिकांश इमारतें आज भी सालों पुरानी और लकड़ी की बनी हुई हैं। बावजूद शहर में अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम होते तो बृहस्पतिवार देर रात धू-धूकर जली मजीठिया परिवार की कोठी को कम नुकसान होता। पीड़ित परिवार की मानें तो अग्निकांड में दस करोड़ से अधिक की संपत्ति राख हो गई है।
मालूम हो कि बृहस्पतिवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे शेरवानी क्षेत्र के मोहन पार्क स्थित 101 वर्षीय स्क्वाड्रन लीडर और गोल्फर दलीप मजीठिया की कोठी में अचानक आग लग गई थी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के लिए पास में स्थित हाईड्रेंट से पानी लेना चाहा, लेकिन हाईड्रेंट ने काम नहीं किया। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों का पानी भी खत्म हो चुका था। उसके बाद पुलिस को हल्द्वानी से अग्निशमन वाहन को बुलाना पड़ा। तब जाकर देर रात आग पर काबू पाया जा सका। अग्निकांड में अंग्रेजों के जमाने में निर्मित और लकड़ी से बनी कोठी के अलावा फर्नीचर, घर का सामान, नगदी, जेवर आदि स्वाह हो गया। मजीठिया के दामाद गुरप्रीत ने बताया कि लगभग दस करोड़ की संपत्ति आग की भेंट चढ़ गई।
होटल में रह रहा है मजीठिया परिवार
नैनीताल। अग्निकांड में कोठी के स्वाह होने के बाद से मजीठिया परिवार पास में स्थित एक होटल में रह रहा है। जानकारी के मुताबिक सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर दलीप मजीठिया अपनी पत्नी और एक नर्स के साथ नजदीकी शेरवानी हिलटॉप होटल में रह रहे हैं। बताया जाता है कि हादसे के बाद से दलीप मजीठिया सदमे में हैं। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए शुक्रवार को उन्हें रुद्रपुर पहुंचा दिया है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मजीठिया के दामाद गुरप्रीत सिंह और बेटी किरन शुक्रवार तड़के रुद्रपुर से नैनीताल पहुंच गए।
सीओ और तहसीलदार ने ली जानकारी
नैनीताल। मजीठिया परिवार की कोठी में हुए अग्निकांड के बाद शुक्रवार को सीओ विजय थापा, तहसीलदार भगवान सिंह चौहान और पटवारी अमित साह ने घटनास्थल पर पहुंचकर परिजनों से अग्निकांड के बारे में जानकारी ली।
सुबह चार बजे तक बुझाते रहे आग
नैनीताल। बृहस्पतिवार रात 11:30 बजे के करीब मजीठिया परिवार की कोठी में लगी आग इतनी विकराल हो चुकी थी उसे बुझाने में पांच घंटे से अधिक का समय लग गया। फायर अफसर कैलाश जाटव ने बताया कि शुक्रवार तड़के चार बजे आग पर काबू पाया जा सका। जाटव का कहना था कि आग बुझाने के लिए समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि घटनास्थल के पास तक दमकल का वाहन भी नहीं जा सका। हाईड्रेंट के पानी में प्रेशर न होने के कारण वह उसका उपयोग नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि कोठी तक पहुंचने वाले रास्ते के आसपास कई वाहनों के आड़े-तिरछे खड़े होने के कारण पानी का पाइप कोठी तक ले जाने में भी दमकल कर्मियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।