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आठ बैड स्वीकृत,एक को लगाने की जगह नहीं

Tue, 29 Nov 2016 01:46 AM IST
भूपेंद्र मोहन रौतेला
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medicine - फोटो : getty images
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मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने वाला अस्पताल ही अगर सुविधा विहीन हो तो मरीजों का उपचार कैसे संभव हो सकेगा। बात हो रही है नैनीताल में बीडी पांडे अस्पताल परिसर में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल की।
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अस्पताल में मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर तो हैं, लेकिन दवा बांटने के लिए फार्मेसिस्ट नहीं है। इतना ही नहीं दवा रखने के लिए अलमारी के अभाव में उन्हें कट्टों में रखा गया है। आठ बैड के इस अस्पताल में एक बैड लगाने तक की जगह नहीं है।

बता दें बीडी पांडे जिला महिला अस्पताल के परिसर में यह आयुर्वेदिक अस्पताल 30 अक्टूबर 2004 से संचालित है। शासन की ओर से अस्पताल को महिला व पुरुष दो विंग में विभाजित किया गया है, लेकिन जगह की कमी की वजह से केवल पुरुष विंग वाला अस्पताल ही चल रहा है।
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पुरुष विंग में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के रुप में डॉ. आरपी पांडे और चिकित्साधिकारी के रुप में डॉ. शुभा पांडे तैनात हैं। महिला विंग की बात करें तो इस विंग की चिकित्साधिकारी डॉ. सौरमी सोनकर 6 जून 2016 से ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज हरिद्वार से संबद्घ हैं तो दूसरे चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप सिंह मेहरा को 21 जनवरी 2015 से राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल फतेहपुर हल्द्वानी से संबद्घ किया गया है।

यही नहीं फार्मेसिस्ट कंचन नबियाल को 28 दिसंबर 2015 से राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल दमुवाढुंगा हल्द्वानी से संबद्घ किया है। जबकि कक्ष सेवक प्रमोद कुमार पांडे पुरुष विंग में कक्ष सेवक का काम देख रहे हैं। पुरुष विंग में फार्मेसिस्ट नहीं होने की वजह से दवा वितरण का जिम्मा भी इन्हीं के जिम्मे है।

वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी पांडे की मानें तो सीजन में अस्पताल में हर रोज 40 से 45 जबकि ऑफ सीजन में 25-30 मरीज हर रोज आते हैं। अस्पताल में औषधि भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से कुछ दवाइयों को छोड़ बाकी को कट्टों में भरकर रखना उनकी मजबूरी है। अस्पताल के लिए जो 8 बैड स्वीकृत हैं उनमें से एक तक को लगाने के लिए जगह नहीं है।

पूरा मामला मेरे संज्ञान में है, अस्पताल में जगह की कमी की वजह से अधिकांश समस्याएं हो रही हैं, दवा रखने के लिए विभाग के पास अलमारियों की कमी नहीं है बशर्ते छोटे से कमरे में उसे कैसे लगाया जाए यह बड़ा सवाल है। जहां तक फार्मेसिस्ट का सवाल है जो भी 14 आयुष विंग है वहां फार्मेसिस्ट नहीं हैं। समस्याओं के समाधान के लिए लगातार शासन और निदेशालय से पत्र व्यवहार किया जा रहा है ताकि मरीजों को परेशानी न उठानी पड़े। 
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- डॉ. केएस नपचियाल, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी नैनीताल।
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