डीडीहाट (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव समिति के चेयरमैन हरीश रावत ने कहा कि 2022 में सत्ता में आने के बाद वह एेंचा पेंचा (कर्ज) लेकर भी डीडीहाट जिला बनाएंगे।
इसके साथ ही उन्होंने डीडीहाट जिला बनाने की मांग को लेकर 55 दिनों से चल रहे आमरण अनशन को समाप्त कराया। संघर्ष समिति के अनुसार पहले चरण का आंदोलन खत्म हुआ है। आगे दूसरे चरण में जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा, उसकी तिथि जल्द घोषित की जाएगी।
बुधवार को डीडीहाट जिला बनाओ संघर्ष समिति के आंदोलन के समर्थन में डीडीहाट पहुंचे हरीश रावत ने जिले के मुद्दे पर भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीति कभी भी उत्तराखंड के विकास की नहीं रही है। उत्तराखंड का गठन यहां की छोटी प्रशासनिक इकाइयों के निर्माण के लिए किया गया था। कांग्रेस की सरकार जब-जब उत्तराखंड की सत्ता में रही उसने तहसीलों का गठन, पटवारी क्षेत्रों का पुनर्गठन करने का काम किया।
2012 से 2016 तक कांग्रेस ने सीमांत क्षेत्रों में तहसीलों का निर्माण कराया ताकि भविष्य में जिलों के गठन में तहसीलों के मानकों को पूरा किया जा सके। 2017 से 2021 तक की भाजपा सरकार ने जिलों का गठन करना तो दूर आज भाजपा के पांच सालों के तीसरे मुख्यमंत्री पूर्व घोषित जिलों का नाम लेने में भी डर रहे हैं।
हरदा ने आमरण अनशन पर बैठे दीपक और राजू बोरा और जिला बनाओ संघर्ष समिति से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील की। हरीश रावत ने दोनों आमरण अनशनकारियों को जूस पिलाकर आमरण अनशन खत्म करवाया।
ये लोग रहे मौजूद
इस मौके पर जिला बनाओ संघर्ष समिति के संयोजक लवि कफलिया, राजू बोरा, डीएस पांगती, केएस जंगपांगी, खड़क सिंह बोरा, गोविंद सिंह बोरा, प्रकाश बोरा, पंकज बोरा, पूर्व विधायक मयूख महर, पूर्व विधायक राज कुमार, प्रदीप पाल, मनोज ओझा, ललित भंडारी, चंचल चौहान, रमेश कापड़ी, रेवती जोशी, गणेश सिंह कन्याल, अजय अवस्थी, सोनू बोरा, हेमंती भंडारी, सुजाता देवी मौजूद रहे।
दूसरे चरण में होगा जेल भरो आंदोलन
डीडीहाट जिला गठन के लिए पहले चरण का आंदोलन था। सबसे बड़ा और पहला आमरण अनशन था जो 55 दिन तक चला। इस आंदोलन में 28 लोग अनशन पर बैठे।
कई विधायकों ने सात दिसंबर से गैरसैंण में शुरू होने जा रहे सरकार के आखिरी विधानसभा सत्र में जिला गठन की मांग को प्रमुखता से रखने की बात कही है। यदि विधायक सत्र में जिला गठन की बात नहीं रखते हैं तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा, जिसकी तिथि शीघ्र ही घोषित कर दी जाएगी। जब तक जिला गठित नहीं होता है संघर्ष जारी रहेगा।
- लवि कफलिया, संयोजक जिला बनाओ संघर्ष समिति डीडीहाट।
सीमांत में डीडीहाट जिले को प्रमुख मुद्दा बनाएगी कांगेस
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट जिले के गठन को कांग्रेस प्रमुख मुद्दा बनाकर आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। आमरण अनशन में डीडीहाट पहुंचे कांग्रेस के चुनाव समिति के चेयरमैन हरीश रावत ने अपने संबोधन में उत्तराखंड में छोटी प्रशासनिक इकाइयों के गठन को घोषणा पत्र में शामिल करने की बात कही है।
रामलीला मैदान से जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन की सरकार ने उत्तराखंड में सीएम बदलने के अलावा कुछ भी नहीं किया है। डीडीहाट जिले के लिए लोग 1962 से आंदोलनरत हैं। भाजपा ने 15 अगस्त 2011 को डीडीहाट सहित चार नए जिले बनाने की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा झूठ साबित हुई। घोषणा के 10 साल बाद भाजपा इन जिलों का नाम भी नही ले रही है। हरीश रावत बातों-बातों में 2022 में डीडीहाट की जनता से कांग्रेस का विधायक देने और जिला लेने की बात कह गए।
महर ने हरदा से की डीडीहाट से चुनाव लड़ने की अपील
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मयूख महर ने पूर्व सीएम हरीश रावत से डीडीहाट से चुनाव लड़ने की अपील की है। उन्होंने भाजपा पर तीखे प्रहार करते हुए कहा कि 25 सालों से डीडीहाट विकास को छटपटा रहा है। सीमांत जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में सबसे पिछड़ा डीडीहाट है। यहां के अस्पताल में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। कई विद्यालयों में शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। सत्ताधारी पार्टी डीडीहाट के विकास को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि डीडीहाट के विकास के लिए हरदा का यहां से चुनाव लड़ना जरूरी है। कहा कि 2017 के चुनाव में कांग्रेस के प्रदीप पाल काफी कम वोटों से हारे थे लेकिन जिले के लिए चले आंदोलन के कारण भाजपा को चुनाव में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
‘हम जिला बनाने जा रहे थे, भाजपा ने सरकार गिरा दी’
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट जिले को मॉडल जिले के रूप में देखने की मेरी भी इच्छा है। उत्तराखंड का गठन सीमांत के विकास के लिए ही किया गया था परंतु भाजपा की सरकार सीमांत के लोगों के साथ छलावा करने से बाज नहीं आ रही है। जब कांग्रेस नये जिलों का गठन करने जा रही थी, उस समय भाजपा ने उनकी सरकार गिरा दी।
पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने संबोधन में कहा कि 2016 में ही डीडीहाट को जिला बनाने जा रहा था। 2016 के मार्च में बजट सत्र में डीडीहाट जिले के गठन को अंतिम रूप दिया जाना था लेकिन भाजपा ने उनकी सरकार को गिरा दिया। उसके बाद भी उन्होंने डीडीहाट सहित नौ जिलों के गठन के लिए 100 करोड़ का जिला कार्पस फंड बनाया ताकि इन नए जिलों का विकास हो सके। 2017 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा और भाजपा ने जिलों का गठन न कर सीमांत के लोगों के साथ धोखा किया। डीडीहाट जिले का गठन कर उसे एक मॉडल जिले के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है।