ज्योलीकोट और बेलुवाखान में लंबे समय तक शराब विरोधी आंदोलन और आमरण अनशन चला। इसके बाद उक्त स्थानों पर शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकीं, लेकिन शराब विक्रेता ने विभागीय सहयोग से निकटवर्ती दो गांव के पास रविवार को देसी शराब की दुकान खोलकर शराब की बिक्री शुरू कर दी। इस दुकान की शुरूआत बेहद गोपनीय तरीके से की गई है।
सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद एनएच से शराब की दुकानों को हटाने की प्रक्रिया में भुजियाघाट से अंग्रेजी और देसी शराब की दुकानों को शिफ्ट करने की कई कोशिश की गई, लेकिन शराब विरोधी आंदोलन से जुड़ी महिलाओं के आंदोलन ने आबकारी विभाग और शराब व्यवसायी को दुकान खुलवाने के लिए नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया।
दोगड़ा और बेलुवाखान में शराब की दुकान के विरोध में महिलाओं ने आमरण अनशन भी किया। लगभग दो माह से ज्यादा चले आंदोलन में मातृशक्ति का पलड़ा भारी रहा। महिलाओं ने 24 घंटे धरना भी दिया था।
2013-14 में भी महिलाओं के संघर्ष के बाद ज्योलीकोट मुख्य बाजार से शराब की दुकानों को हटाने के लिए प्रशासन को मजबूर होना पड़ा था। तब दुकानों को भुजियाघाट शिफ्ट किया गया था। लेकिन रविवार को गुपचुप तरीके से दोगांव में देसी शराब की दुकान खोल दी गई।
दो गांव में शराब की दुकान खुलने की भनक लगते ही ग्रामीण गुपचुप रूप से इसके विरोध की रणनीति तय करने लगे हैं। हालांकि अभी दोगांव से शराब की दुकान हटाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन क्षेत्र की महिलाओं ने इस संबंध में अपने जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से शराब की दुकान को दो गांव से हटाने के लिये सहयोग मांगना शुरू कर दिया है। महिलाएं सोशल मीडिया के माध्यम से भी दो गांव से शराब की दुकान हटाने को लेकर खासी सक्रिय हैं।