जनता ही असली जनार्दन है। खांटी नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से बेहतर इसे कौन समझ सकता है। सत्ता की बागडोर छीनने के बाद पहली बार पहुंचे हरीश रावत हल्द्वानी में राम के पवित्र मंच से चुनावी मैदान में उतरने की मंशा जाहिर कर गए। बोले, मोदी और अमित शाह ने मिलकर उत्तराखंड में लोकतंत्र की हत्या की। अब सोल्जर बनकर जनता ही उन्हें सबक सिखाएगी।
लोकतंत्र बचाओ यात्रा की अगुवाई करने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि लोकतंत्र और उत्तराखंड बचाने की मुहिम में उत्तराखंड का हर व्यक्ति सिपाही है। प्रदेश की सभी लोकतांत्रिक ताकतें मोदी और अमित शाह को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए उनका सिपहसलार बनकर खड़ी हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मोदी और शाह की इस साजिश के बाद उनका हौसला और ताकत बढ़ी है। प्रदेश की जनता पूरी तरह उनके साथ खड़ी है।
पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के नहीं बल्कि खुद के कार्यकाल में हुए विकास कार्य अंगुलियों पर गिनाए। बोले, दो साल में अपने मंत्रिमंडल के सहयोग से हर तरफ विकास की गंगा बहा दी। खुद नीति आयोग की रिपोर्ट इसकी गवाह है।
दुर्गापाल की गैर मौजूदगी चर्चाओं में
कांग्रेस के लोकतंत्र बचाओ यात्रा में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं लालकुआं के विधायक हरीश चंद्र दुर्गापाल की गैर मौजूदगी सियासी गलियारों में चर्चाओं में रही। यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, डा. इंदिरा हृदयेश समेत कई कांग्रेसी नेताओं की मौजूद रही। हरीश चंद्र दुर्गापाल हरीश रावत सरकार की कैबिनेट में भले ही पीडीएफ के रूप में शामिल रहे, लेकिन वह पुराने कांग्रेसी हैं। उनकी गैर मौजूदगी चर्चाओं में रही। हालांकि हरीश चंद्र दुर्गापाल ने फोन पर बताया कि वह पीडीएफ की देहरादून में मीटिंग में हैं और पीडीएफ कांग्रेस के साथ है।