उत्तराखंड में खंडों में बंटी कांग्रेस काफी लंबे समय के बाद एकजुट दिखाई पड़ी। हाथ में हाथ कांग्रेस साथ-साथ जैसी बात आज नेताओं के व्यवहार से परिलक्षित हो रही थी। बड़े से लेकर छोटे नेता सभी एक-दूसरे को पूछ रहे थे। सभी ने अपने संबोधन में बड़े नेताओं से लेकर विधायकों तक का नाम लिया। पूर्व मुख्यमंत्री रावत तो एक-कदम आगे निकल गए और पीडीएफ एवं बसपा विधायकों के साथ खड़े रहने के लिए पीठ थपथपाई।
राज्य में कांग्रेस के अंदर धड़ेबाजी कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर अंतर्कलह ने सरकार और संगठन को असहज किया है। अपनों से चोट खाने के बाद प्रदेश में बदले सियासी समीकरण के बाद कांग्रेस अब साथ-साथ नजर आ रही है। पूर्व वित्त मंत्री ने पदयात्रा और सभा में हजारों की भीड़ एकत्र कर अपनी ताकत का एहसास करा दिया। हालांकि पदयात्रा में कुमाऊं के विधायक एवं अन्य कांग्रेसी भी आए थे। पूर्व मुख्यमंत्री रावत के लिए खेवनहार भी पूर्व वित्त मंत्री डा. हृदयेश और पूर्व सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य ही बने।
सरकार पर संकट आने पर रावत के साथ दोनों ही नेता एकजुट होकर खड़े रहे। हालांकि डा. हृदयेश एवं आर्य को कई बार सरकार में उपेक्षा भी झेलनी पड़ी। रविवार को रामलीला मैदान में पूर्व सीएम ने डा. हृदयेश और आर्य का कई बार नाम लिया। उन्होंने सभा में मौजूद अन्य विधायकों को याद करने के साथ ही पीडीएफ और बसपा को भी याद किया। रावत ने अपने संबोधन के दौरान प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, विकास दर में बढ़ोतरी, 22-23 घंटे बिजली, सबसे बेहतर सड़क, अध्यापकों की भर्ती, केंद्र के सहायता न देने पर 15 सौ करोड़ की आमदनी के नए स्रोत जुटाने और नौ सौ करोड़ से बढ़ाकर जनहित में 24 सौ करोड़ खर्च करने, विभिन्न पेंशन योजनाओं समेत अपने कार्यकाल की तमाम उपलब्धियां गिनाई।
कहा कि जिंदाबाद एवं मुर्दाबाद के नारों से नहीं ऐसी स्थिति पैदा करो कि कांग्रेस को 60 सीटें मिलें। इस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी, प्रदेश सहप्रभारी संजय कपूर, प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया, जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल, शहर अध्यक्ष हरीश मेहता, विधायक हेमेश खर्कवाल, खजान पांडे, तिलक राज बेहड़, सुरेश गंगवार, नारायण पाल, सुमित हृदयेश, शिल्पी अरोड़ा, बलबीर रावत, मयंक भट्ट, बीना जोशी, जया बिष्ट, ललित जोशी, ब्लाक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, हर्षवर्धन पांडे, कमल पपनै, रामसिंह कैड़ा, हरेंद्र बोरा, हाजी सुहेल सिद्दीकी, प्रेम लता सिंह, केदार पलड़िया, मंधु सांगुड़ी, विमला सांगुड़ी, विजय सिजवाली, राजेंद्र सुयाल आदि थे।
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इंदिरा तो जवानों में जवान
हल्द्वानी। पूर्व वित्त मंत्री डा. इंदिरा हृदयेश को बुजुर्ग कहना तो बुजुर्गों का अपमान है। वे तो जवानों से भी जवान हैं। पूर्व सीएम रावत ने कहा कि मैंने डा. हृदयेश से कहा कि गाड़ी में बैठकर चलते हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि क्या आप मुझे बूढ़ा समझ रहे हैं।
जमीन पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठ गए किशोर
हल्द्वानी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय मंच से उतरकर कार्यकर्ताओं के बीच आ गए। मंच के ठीक सामने कार्यकर्ताओं के साथ बैठ गए। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी भी उन्हीं के साथ बैठे रहे। किशोर और जोशी को जमीन पर बैठा देख अन्य नेताओं ने भी उन्हीं के साथ बैठना मुनासिब समझा।
रावत और कपूर जनता के बीच बैठे
हल्द्वानी। मंच पर नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की भीड़ देख पूर्व सीएम रावत ने माइक थाम लिया कहा कि मैं और प्रदेश सहप्रभारी संजय कपूर सबसे पीछे कुर्सी पर बैठेंगे और जितने नेता हैं वे मंच पर आ जाएं। रावत और कपूर रामलीला मैदान में सबसे पीछे पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठे गए। कार्यकर्ताओं ने रावत को वहां भी घेर लिया।
सेल्फी लेने की रही होड़
हल्द्वानी। रामलीला मैदान में कांग्रेस की सभा के दौरान सेल्फी लेने की भी होड़ मची रही। पूर्व मुख्यमंत्री रावत, पूर्व वित्त मंत्री डा. हृदयेश, राष्ट्रीय सचिव प्रकाश जोशी और सुमित हृदयेश के साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ मची रही। सेल्फी लेने वालों में सबसे ज्यादा युवा थे।
शिल्पी हुई चोटिल
हल्द्वानी। पदयात्रा में शामिल होने पहुंची कांग्रेस की प्रवक्ता शिल्पी अरोड़ा चोटिल हो गई। शिल्पी के पैर पर चोट आई। शिल्पी ने कृष्णा हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर पहुंचकर प्राथमिक इलाज कराया और फिर रामलीला मैदान सभा में पहुंची।