कभी घर की चहारदीवारी में कैद रही महिलाएं आज बैंकिंग, व्यवहार, नेतृत्व क्षमता विकसित कर समूहों का बेहतर संचालन कर रही हैं। इससे परिवार की आजीविका तो बढ़ ही रही है, वे आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर हो रही हैं। महिला सशक्तीकरण के लिए ये महिलाएं अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं।
नगर निगम के सहयोग से 10 स्वयंसेवी समूहों का एक एरिया लेबल फेरडेरशन (क्षेत्र स्तरीय संघ) बनाया गया। सरकार की ओर से इस संघ को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। इसके अलावा भिटौली समूह से जुड़े प्रत्येक समूह को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। नगर निगम के नगर परियोजना प्रबंधक आईपी पंत बताते हैं कि भिटौली समूह की महिलाओं ने अपनी बचत से बर्तन खरीदे। उन्हीं के बूते अपना काम जमाया।
शुभ अवसरों पर घरों में भोजन आदि बनाता है समूह
भिटौली समूह में बैणी सेना की भी कुछ सदस्य हैं। वे लोगों के घरों से उपनयन, मुंडन, कथा, शिवार्चन आदि अवसरों के काम भी लेती हैं। वहां प्रसाद, चाय, नाश्ता, भोजन बनाती हैं। नगर निगम के अलावा अन्य सरकारी विभागों के छोटे-छोटे आयोजनों में भी इसी समूह को काम दिया जाता है। वर्तमान में यह समूह 200 से 500 लोगों का भोजन बनाने में सक्षम है।
1500 रुपये तक रोजाना आय
परियोजना प्रबंधक आईपी पंत बताते हैं कि भिटौली समूह औसतन प्रतिदिन करीब एक हजार से 1500 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहा है। इसके अलावा कुछ महिलाएं तहसील आदि में कैंटीन का संचालन भी कर रही हैं। भिटौली समूह के जरिये महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। नेतृत्व क्षमता विकसित हुई है। झिझक खत्म हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर परिवार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सरकारी, गैर सरकारी आयोजनों में भोजन, चाय, नाश्ता आदि का काम भिटौली समूह को दिया जाता है। महिलाएं आत्मनिर्भर होने के साथ ही महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। इस समूह को आगे और प्रोत्साहित किया जाएगा। -गजराज सिंह बिष्ट, मेयर