हल्द्वानी। दो साल पहले कोरोना नाम के अदृश्य वायरस ने जहां करोड़ों लोगों की जिंदगी को लील लिया था वहीं टीकाकरण ने जीवन बचाने के साथ लोगों को नया जीवन देने का भी काम किया। यदि टीकाकरण नहीं हुआ होता तो शायद देश में कोरोना संक्रमित मृतकों की संख्या कई गुना ज्यादा रही होती।
वैश्विक महामारी में जहां लोग जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, वहीं कुछ लोग उन्हें हताश कर रहे थे। ऐसी स्थिति में समाज के जागरूक युवाओं ने टीकाकरण को लेकर लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने का काम बखूबी किया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अधिकांश जागरूकता अभियान युवाओं ने निजी संसाधनों से चलाए। नतीजा यह रहा कि टीकाकरण को लेकर भ्रम की स्थिति दूर हुई और अधिकांश लोग टीकाकरण के लिए अलग-अलग स्थानों पर आयोजित शिविर स्थलों में पहुंचे।
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कोट- 1
बीए का छात्र हूं और ट्यूशन पढ़ाता हूं। वैक्सीनेशन के समय अपनी ऑनलाइन कक्षा में जितने भी बच्चे थे उन्हें मैसेज और शायरी के माध्यम से जागरूक किया और जितने ट्यूशन पढ़ने वाले बच्चे थे उन्हें और उनके परिवारजनों तथा पड़ोसियों को जागरूक किया।
-उदित पलड़िया, छात्र।
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कोट- 2
मैंने कविताओं के माध्यम से लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक किया और अपने परिचित सभी बुजुर्गों को बच्चों को टीकाकरण कराने का आग्रह किया। लोगों की सोशल मीडिया पर गलत पोस्टों पर टिप्पणी कर उनसे गलत भ्रांतिया फैलाने से मना किया।
-चांदनी बड़ौला, छात्रा, महिला महाविद्यालय हल्द्वानी।
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कोट-3
कोविड के दौैरान लोगों को टीकाकरण के फायदों की जानकारी दी और उनमें टीकाकरण को लेकर उपजे भ्रम को दूर किया। बताया कि टीकाकरण से ही कोरोना को हराया जा सकता है। इस अभियान का फायदा हुआ और लोग बड़ी संख्या में टीकाकरण कराने पहुंचे।
-मनोज साह जगाती, समाजसेवी नैनीताल
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कोट-4
कोरोना टीकाकरण को लेकर शुरू में लोग दहशत में थे और टीका लगाने नहीं जा रहे थे। कई बार लोगों को घर-घर जाकर टीकाकरण के फायदे समझाए। बताया कि टीका लगाने के बाद वे अपनी और अपने परिवार के साथ आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
-तेंजिनछिरिंग खंपा स्थानीय निवासी
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दूर कीं भ्रांतियां, राशन देकर टीकाकरण केंद्र तक लाए
हल्द्वानी। टीकाकरण के लिए जहां सरकार से लेकर हर कोई लोगों को जागरूक कर रहा थी वहीं कुछ असामाजिक लोग सोशल मीडिया पर लेख और वीडियो के माध्यम से तरह-तरह की भ्रांतियां भी फैला रहे थे जिससे टीकाकरण करा रहे लोगों के मन में शंका पैदा होने लगी थी। यह देख मेरे मन में विचार आया की यदि कुछ लोग भ्रांतियां फैला सकते हैं तो हम उन भ्रांतियों को सोशल मीडिया के माध्यम से मिटा भी सकते हैं। इसलिए मैंने अपने सोशल व्हाट्सप, फेसबुक पर पोस्ट और वीडियो के माध्यम से टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक करने की अपील डालनी शुरू की और टीकाकरण के फायदे भी बताये। इस दौरान जितने भी मेरे संपर्क के लोग संक्रमण से स्वस्थ होकर नई जिंदगी जीने लगे थे, उन्हें व्यक्तिगत तौर पर संपर्क किया और टीकाकरण के लिए जागरूक किया। ऐसा भी मौका आया कि लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राशन देना पड़ा। असहाय लोगों का टीकाकरण रजिस्ट्रेशन करने के साथ उन्हें टीकाकरण केंद्र तक पहुंचाने का भी काम किया।
-उमेश बिनवाल, जज फार्म, हल्द्वानी।