नैनीताल। ज्योलीकोट में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की जांच में दस नमूने फेल होने के बाद जल संस्थान ने भी क्षेत्र में पानी की तत्काल जांच कराई। बुधवार देर शाम देहरादून से चीफ कैमिस्ट डॉ. विकास कंडारी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने विभिन्न स्थानों पर पानी में क्लोरीन की मात्रा जांची। विभाग के अनुसार सभी स्थानों पर क्लोरीन निर्धारित मानकों के अनुरूप मिली।
पीसीबी की रिपोर्ट सामने आने के बाद जल संस्थान ने नमूने लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। नैनीताल जल संस्थान के अवर अभियंता रविंद्र पाठक के अनुसार पीसीबी की टीम ने जल संस्थान के किसी कर्मचारी की मौजूदगी के बिना पानी के नमूने एकत्र किए थे। इसी आधार पर विभाग ने जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट पर असंतोष जताया है।
उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता की जांच बढ़ा दी गई है। बुधवार शाम अधिकारियों ने 10 से अधिक स्थानों से पानी के नमूने लिए। मौके पर की गई क्लोरीन जांच में सभी जगह मात्रा मानक के अनुरूप मिली। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार इससे पानी की पूरी गुणवत्ता का आकलन नहीं किया जा सकता। विस्तृत जांच के लिए नमूने देहरादून भेजे जाएंगे। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही पानी की गुणवत्ता की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
दूषित पानी के साथ व्यवस्था की चूक आई सामने, जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार
नैनीताल। ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में बीमारी के प्रकोप के बाद पेयजल व्यवस्था को लेकर विभागीय स्तर पर हुई चूक के सवाल भी उठने लगे हैं। बीमारी के कारण अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई परिवार इलाज के खर्च से आर्थिक दबाव में हैं। मामले के सामने आने के बाद पानी के नमूने लिए जा रहे हैं, टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है और स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
ग्रामीण गौरव, राहुल और अंकित समेत अन्य लोगों का कहना है कि पानी की नियमित जांच, पेयजल स्रोतों की निगरानी और टैंकों की समय-समय पर सफाई की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उनका कहना है कि बीमारी सामने आने के बाद पानी के नमूने लिए जा रहे हैं और व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन विभागीय जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि पेयजल व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई थी या नहीं और यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाएगा। जांच में यदि जानबूझकर कृत्य करने या लापरवाही बरतने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। - दीपक रावत, कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए कुछ नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है जबकि कुछ रिपोर्ट आना बाकी है। शासन ने सभी जिलों के लिए मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है। कमेटी मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में व्यवस्थाएं दुरुस्त करना प्राथमिकता है। - ललित मोहन रयाल , डीएम
ज्योलीकोट में ट्यूबवेल और अल्ट्रा फिल्ट्रेशन प्लांट की तैयारी
नैनीताल/ज्योलीकोट। ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में बीमारी के प्रकोप के बाद पेयजल व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के संज्ञान और मामला शासन-प्रशासन तक पहुंचने के बाद जल संस्थान ने नया ट्यूबवेल स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्ट्रा फिल्ट्रेशन प्लांट लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके लिए क्षेत्र में सर्वे शुरू कर दिया गया है।
जल संस्थान के ईई अनीष पिल्लई ने बताया कि प्रस्तावित ट्यूबवेल से ज्योलीकोट, गांजा, चोपड़ा समेत आसपास के क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। ट्यूबवेल से प्राप्त पानी को अल्ट्रा फिल्ट्रेशन प्लांट के माध्यम से शुद्ध करने के बाद आपूर्ति की जाएगी।
उन्होंने बताया कि बुधवार को विभाग को क्षेत्र से 15 शिकायतें मिली थीं, जिनका निस्तारण कर दिया गया है। पेयजल टैंकों की सफाई का काम भी जारी है। सफाई के बाद प्रत्येक टैंक पर सफाई की तारीख अंकित की जाएगी, ताकि भविष्य में निर्धारित अंतराल पर टैंकों की सफाई सुनिश्चित की जा सके।