पर्यटन के लिहाज से विश्व प्रसिद्ध नैनीझील और उससे लगे समस्त नालों के रखरखाव का जिम्मा अब सिंचाई विभाग करेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के अनुरूप कई दिनों की लिखापढ़ी के बाद लोनिवि ने नैनीझील और उससे लगे समस्त नालों के अलावा को सिंचाई खंड नैनीताल के सुपुर्द कर दिया है।
झील हस्तांतरण होने के बाद सिंचाई विभाग ने तल्लीताल डांठ में स्थित झील नियंत्रण कक्ष में अपने कर्मचारी को तैनात कर दिया है जो कि प्रत्येक दिन झील में पानी की स्थिति पर नजर रखेगा और उसे रिकार्ड करेगा।
आजादी के बाद से लेकर अब तक नैनीझील के रखरखाव का जिम्मा लोनिवि के पास था, जबकि जिले के अन्य सभी झीलों का रखरखाव सिंचाई विभाग करता था। नैनीझील के घटते बढ़ते जल स्तर पर नजर रखने के लिए लोनिवि ने डांठ में कंट्रोल रूम बनाया था जिसमें लोनिवि का ही कर्मचारी तैनात रहता था।
मुख्यमंत्री द्वारा झील का स्वामित्व सिंचाई विभाग को दिए जाने संबंधी निर्देश के बाद से ही लोनिवि और सिंचाई विभाग द्वारा इस संबंध में कार्रवाई की जा रही थी। झील पर स्वामित्व सौपे जाने से पहले दोनों विभाग के अधिकारियों ने झील और उससे लगे समस्त नालों का स्थलीय निरीक्षण कर लिखापढ़ी की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया था।
समस्त औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लोनिवि ने नैनीझील और सभी 49 नाले सिंचाई विभाग के सुपुर्द कर दिए हैं, जिसके बाद विभाग ने झील नियंत्रण कक्ष में अपने कर्मचारी की तैनाती करते हुए तल्लीताल डांठ में झील के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने वाला पोस्टर लगाते हुए नियंत्रण कक्ष को चालू कर दिया है।
नैनीझील पर अब तक लोनिवि का स्वामित्व था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लोनिवि ने उक्त झील का स्वामित्व और झील से संबधित सभी दस्तावेज सिंचाई विभाग को सौप दिए हैं। झील और नालों की रखरखाव का कार्य अब सिंचाई विभाग द्वारा कराया जाएगा। -हरीश चंद्र सिंह भारती, अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड नैनीताल
नैनीझील पर एक नजर
कुल लंबाई : 1432 मीटर
औसत चौड़ाई : 360 मीटर
अधिकतम गहराई : 28 मीटर
सतही क्षेत्रफल : 48.76 हेक्टेयर
कैचमेंट एरिया : 424.20 हेक्टेयर