नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने के मामले में अब कानूनी मोर्चा खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। बुधवार को राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ की बैठक में निर्णय लिया गया कि इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर की जाएगी।
राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े मामलों में लंबे समय से कानूनी पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रमन शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया। रमन शाह ने कहा कि राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू उत्तराखंड राज्य पुनर्गठन अधिनियम में उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्यालय स्पष्ट रूप से नैनीताल नगर में निर्धारित है। ऐसे में केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर हाईकोर्ट का स्थानांतरण कानून सम्मत नहीं माना जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के हल्द्वानी अथवा किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरण से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जब तक संसद अधिनियम में संशोधन नहीं करती तब तक हाईकोर्ट को नैनीताल से अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। कानून से ऊपर कोई प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य की भौगोलिक एवं सांविधानिक अवधारणा को ध्यान में रखते हुए ही हाईकोर्ट की स्थापना नैनीताल में की गई थी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब उसी मूल भावना की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर कर न्यायिक पुनर्विचार की मांग की जाएगी। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डीएस मेहता ने हाईकोर्ट स्थानांतरण के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य आज अनेक गंभीर और ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहा है जिनके समाधान पर सरकार का ध्यान अपेक्षित था। इसके बजाय हाईकोर्ट स्थानांतरण जैसे निर्णय को प्राथमिकता देना कई सवाल खड़े करता है। बैठक में कई अधिवक्ता शामिल थे।