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Nainital News: प्रशासन के निर्देशों का नहीं दिख रहा असर, महंगी पुस्तकों से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ

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हल्द्वानी। प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का कुछ निजी स्कूलों पर असर नहीं पड़ा है। बीते बृहस्पतिवार को प्रशासन ने निजी स्कूल और पुस्तक विक्रेताओं के साथ बैठक कर निर्देश दिए थे कि ऐसे प्रकाशकों की किताबें ही लगाएं जिनकी कीमत एनसीईआरटी के बराबर है। ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ ना पड़े, लेकिन निजी स्कूल विद्यार्थियों से एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुकाबले पांच से छह गुना महंगी किताबें मंगवा रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें 100 रुपये से कम कीमत की हैं, जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें 300 से 600 रुपये में बेची जा रही है।
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नैनीताल रोड स्थित एक निजी स्कूल में कक्षा छह के विद्यार्थियों को 20 पुस्तकें खरीदनी हैं। इनमें से एनसीईआरटी की 10 पुस्तकें 740 रुपये की है जबकि निजी प्रकाशकों की 10 किताबों की कीमत 3290 रुपये है। संपूर्ण शिक्षक सामग्री खरीदने में अभिभावकों का 4969 रुपये का खर्च आ रहा है। इसी तरह कक्षा आठ में एनसीईआरटी की 10 किताबें 725 रुपये में और निजी प्रकाशकों की 10 पुस्तकें 3490 रुपये और शिक्षण सामग्री में पूरा खर्च 5149 रुपये आ रहा है।
नर्सरी से पांच तक के बच्चों को भी दो से तीन हजार रुपये की पुस्तकें खरीदनी पड़ रही है। शहर के एक निजी स्कूल में कक्षा एक के लिए 11 किताबें विद्यार्थियों से मंगवाई गई हैं। इनमें 195 रुपये की तीन किताबें एनसीईआरटी और 2114 रुपये की सात किताबें निजी प्रकाशकों की शामिल हैं। अभिभावकों को पूरी शिक्षण सामग्री लेने में 2984 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। यूकेजी के बच्चों के लिए 2037 रुपये की सात किताबें मंगाई गई है। अभिभावकों का कहना है कि कुछ दुकानदार एनसीईआरटी की किताबें अधिक प्रिंट रेट वाली बेच रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को तुरंत इस पर रोक लगानी चाहिए।
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कक्षा छह की एनसीईआरटी की किताबों के अलग-अलग दाम
वसंत बाग 64-83 रुपये
बाल रामकथा 45- 58 रुपये में
हनी सकल 65 और 83 रुपये
ए पैक्ट विद द सन 34 और 45 रुपये
रुचिरा प्रथमो भाग 55 और 71 रुपये
साइंस 65 और 83 रुपये
मैथमेटिक्स 65 और 83 रुपये
द अर्थ अवर हैबिटेट 55 और 70 रुपये
सोशियल एंड पॉलिटिकल लाइफ 58 और 84 रुपये
नोट: बुक सेलर द्वारा प्रिंट रेट पर बेची जा रही किताबें
कक्षा सात में कहीं 17 तो कहीं 13 किताबें

हल्द्वानी। एक निजी स्कूल में कक्षा सात में 13 किताबें लगाई हैं। विद्यार्थियों को 10 किताबें एनसीईआरटी और तीन किताबें निजी प्रकाशकों की लानी हैं। शिक्षण सामग्री का खर्च 2479 रुपये आ रहा है। वहीं दूसरे निजी स्कूल ने कक्षा सात में 17 किताबें लगा दी हैं, इनमें 10 किताबें एनसीईआरटी और सात किताबें निजी प्रकाशकों की है। यहां कक्षा सात की शिक्षण सामग्री लेने में अभिभावकों को 3729 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। संवाद
चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की मोनोपॉली बरकरार
हल्द्वानी। प्रशासन ने चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की मोनोपॉली तोड़ने के लिए निजी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि चुनिंदा दुकानों के बजाए सभी दुकानों से किताबें खरीदी जाएं लेकिन निजी स्कूलों में जिन प्रकाशकों की किताबें लागू की हैं वह चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध हैं। ऐसे में उन चुनिंदा दुकानों पर ही अभिभावक निर्भर है। चुनिंदा दुकानों में लंबी लाइन लगी हुई हैं, वहीं अन्य बुकसेलर सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही बेच रहे हैं। संवाद
लोकसभा चुनावों की आड़ में निजी स्कूल खुली मनमानी कर रहे हैं। स्कूलों की ओर से मंगाई जा रही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें चुनिंदा दुकानों पर ही मिल रही है। दुकान तय होने से कमीशन का खेल नजर आ रहा है। कुछ स्कूलों ने स्कूल ड्रेस चेंज कर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
मदन मोहन जोशी, संयोजक, अभिभावक संघर्ष समिति
यदि कोई निजी स्कूल अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं तो अभिभावक इसकी लिखित शिकायत शिक्षा विभाग को करें ताकि ऐसे स्कूलों के खिलाफ विभाग की ओर से कार्रवाई की जा सके।
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जगमोहन सोनी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल
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