हल्द्वानी। नगर निगम क्षेत्र में शामिल दमुवाढूंगा बंदोबस्ती गांव में शामिल सरकारी जमीन को जिला प्रशासन अपने कब्जे में लेगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मौके पर ऐसी जमीन को चिह्नित किया जा रहा है। इसके लिए पूर्व में ही राजस्व विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी भी गठित की जा चुकी है।
वर्ष 2016 में ग्राम दमुवाढूंगा बंदोबस्ती को तत्कालीन सरकार ने राजस्व गांव घोषित कर दिया था। वर्तमान में भू अभिलेख से संबंधित कार्यों के शुरू न होने के कारण नक्शा व खसरा इत्यादि तैयार नहीं किए गए हैं। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ लोग वहां खाली पड़ी सरकारी जमीन और भूखंडों पर कब्जा करने की कोशिश में लगे हुए हैं। यही नहीं स्टांप पेपरों से जमीन की खरीद फरोख्त भी हो रही है।
मामला संज्ञान में आने के बाद हल्द्वानी के उपजिलाधिकारी राहुल शाह ने 19 मई को राजस्व विभाग, नगर निगम के अधिकारियों की नौ सदस्यीय एक कमेटी गठित की थी। इसमें हल्द्वानी और रामनगर के नायब तहसीलदार, रामनगर के सर्वे कानूनगो, लेखपाल, राजस्व उपनिरीक्षकों के अलावा नगर निगम के दो नामित अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। कमेटी को दमुवाढूंगा स्थित राजकीय भूमि को चिह्नित कर उसकी सूची तैयार करने और राजकीय भूमि पर कब्जा प्राप्त करने के निर्देश दिए गए थे।
दमुवाढूंगा में डर का माहौल : सुमित
कांग्रेसी विधायक सुमित हृदयेश का कहना है कि दमुवाढूंगा क्षेत्र के लोग आजकल प्रशासनिक दबाव और डर के माहौल से जूझ रहे हैं। कहा, इस क्षेत्र को वर्ष 2002 में उनकी माता स्व. इंदिरा ह्रदयेश ने गोद लिया था और वहां अभूतपूर्व विकास कार्य किए। उनके सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने वहां दो करोड़ से अधिक की लागत से सड़क निर्माण सहित कई विकास योजनाएं संचालित कराई हैं।
सुमित का कहना है कि इंदिरा ह्रदयेश चाहती थीं कि दमुवाढूंगा के लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिले। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2016 में क्षेत्र को राजस्व ग्राम के रूप में बंदोबस्त घोषित कराया। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार न केवल इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में विफल रही है, बल्कि अब यह कह रही है कि दमुवाढूंगा में नए लोगों ने कब्जा किया है। सरकार और प्रशासन वहां दशकों से रह रहे लोगों को बेदखल करने की कोशिश कर रहा है, जो कि सरासर गलत और असंवेदनशील है। विधायक का कहना है कि प्रशासन ने काठगोदाम क्षेत्र में मलिन बस्ती श्रेणी ए के लोगों को डरा-धमकाकर उनके घर तुड़वा दिए, जबकि इन बस्तियों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है और प्रशासन को उन्हें हाथ तक लगाने का अधिकार नहीं है।
कोट-
दमुवाढूंगा क्षेत्र में खाली पड़ी सरकारी जमीन को चिह्नित कर प्रशासन के कब्जे में लेने के लिए कमेटी गठित की गई थी। कमेटी को ऐसी भूमि चिह्नित कर सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे। कमेटी का कार्य अंतिम चरण में है। अभी इस संबंध में कमेटी ने रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। -राहुल शाह उपजिलाधिकारी नैनीताल।