हल्दूचौड़ (नैनीताल)। बिंदुखत्ता पर्यावरण संघर्ष समिति सेंचुरी पेपर मिल के संचालन से प्रदूषण होने का आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रही थी। समिति की मांग पर प्रशासन ने टीम गठित बृहस्पतिवार से जांच शुरू कर दी। इसी क्रम में लालकुआं तहसील में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ एसडीएम और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने खुली बैठक कर जांच करने का आश्वासन दिया। प्रशासन के अनुसार मामले की जांच शुरू भी हो गई है।
लालकुआं तहसील कार्यालय में एसडीएम की अध्यक्षता में हुई खुली बैठक के दौरान बिंदुखत्ता पर्यावरण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सेंचुरी पेपर मिल पर बिंदुखत्ता एवं लालकुआं क्षेत्र में ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण करने का आरोप लगाया। कहा कि प्रदूषण से क्षेत्र में लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एसडीएम विवेक राय ने कहा कि जांच टीम में शामिल सदस्य विशेषज्ञ अपनी विशेषज्ञता के आधार पर सभी बिंदुओं की गहनता से जांच करेंगे और सैंपल भी लेंगे।
उच्चस्तरीय प्रयोगशाला में भी जांच कराई जाएगी। लगभग दो घंटे चली बैठक में जांच की गति तेज करने का निर्णय लिया गया। जांच टीम में पीसीबी, स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जल संस्थान, वन विभाग और प्रशासन के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं।
बैठक में तहसीलदार लालकुआं महेंद्र पाल सिंह, हरीश चंद्र जोशी, नरेश गोस्वामी, सहायक अभियंता जल संस्थान विनोद कुमार श्रीवास्तव, मेडिकल कॉलेज से डॉ. दीपक जोशी, डॉ. महेश भट्ट, डॉ. लव पांडे, एसीएमओ डॉ. एमएम तिवारी, वन विभाग के एसडीओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया, पर्यावरण संरक्षण समिति अध्यक्ष नंदन बोरा अध्यक्ष, हरीश बिसौती, हर्ष बिष्ट, जीवन जोशी, आनंद गोपाल बिष्ट, राजू नेगी, आनंद गोपाल सिंह, कुंदन सिंह आदि रहे।
बिंदुखत्ता के लोग लंबे समय से सेंचुरी पेपर मिल लालकुआं से वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण होने की बात कहकर जांच की मांग कर रहे थे। इस पर जिलाधिकारी नैनीताल ने टीम गठित की है। मामले में जांच शुरू करते हुए लालकुआं तहसील में सेंचुरी के प्रदूषण को लेकर आंदोलन कर रही संघर्ष समिति के साथ बैठक कर उनकी बात सुनी गई है। मामले में सभी पक्षों को सुना भी जाएगा। -विवेक राय, एसडीएम
सेंचुरी पल्प एंड पेपर मिल ने वर्ष 2012 से 2018 तक पर्यावरण के क्षेत्र में 150 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। साथ ही जल, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगाएं है। मिल जल निस्तारण मानकों के अनुरूप ही होता है। केवल यह पानी पीने योग्य नहीं है। सरकार के अधीन सीपीसी संस्था जल निस्तारण पर ऑनलाइन मॉनीटरिंग भी करती है। इसके बाद ही जल निस्तारण होता है। -जेपी नारायण, मुख्य संचालन अधिकारी, सेंचुरी पेपर मिल, लालकुआं