पब्लिक स्कूलों की मनमानी के मुद्दे पर गुरुवार को नगर निगम सभागार में प्रशासन द्वारा बुलाई गई बैठक में जमकर बवाल हुआ। मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने, किताब एवं ड्रेस में कमीशनबाजी के आरोप पर एबीवीपी कार्यकर्ता और स्कूल संचालकों के बीच गरमागरमी हुई। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने पर प्रशासन को बीचबचाव करना पड़ा।
शाम सवा चार बजे शुरू हुई बैठक में पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं इंस्प्रेशन स्कूल के निदेशक दीपक बल्यूटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी स्कूल प्रतिवर्ष 10 से 12 फीसदी फीस बढ़ा सकते हैं। उन्होंने स्कूल परिसर में दुकान लगाकर बुक्स बेचने को गलत कार्य बताया। रही बात एनसीआरटी की किताबों की तो वह साल भर तक उपलब्ध नहीं होती, इसलिए मजबूरी में निजी पब्लिशर्स की किताबें लगानी पड़ती है।
पीएसए की इस तर्क पर विद्यार्थी परिषद के बृजेश बनकोटी ने सवाल किया कि आरटीई में नियम है कि निजी स्कूलों को अपने यहां एसएमसी और पीटीए का गठन करना अनिवार्य है, इन कमेटियों में प्रबंधन ने कितने अभिभावकों को शामिल किया बताएं। कितने पब्लिक स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने, टीचर्स की सैलरी बढ़ाने पर कब-कब एसएमसी की बैठक कर सहमति ली। कार्तिक हर्बोला, चंद्रप्रकाश तिवारी, चंद्रशेखर जोशी आदि कई विद्यार्थी परिषद नेताओं ने स्कूलों की मनमानी को जोर से उठाना शुरू कर दिया। स्कूल वाले भी सामने आ गए जिस पर हंगामा हो गया, सिटी मजिस्ट्रेट किसी तरह कार्यकर्ताओं को बैठाया। दीक्षांत स्कूल के प्रबंधक समित टिक्कू ने कुछ सफाई देने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं ने मुद्दे से भटकाने की बात कह कर हल्ला कर दिया जिस पर उन्हें बैठाना पड़ा।
बीएलएम स्कूल की प्रधानाचार्या रजनीकांता बिष्ट ने कहा कि स्कूलों की कुछ कमी के कारण ही आज अभिभावकों और स्कूलों के बीच यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने अपने स्कूल के बसों के खर्चे का हवाला देते हुए बताया कि हमें साढ़े 4 लाख बस किराया मिलता है और आठ लाख बस संचालकों को देना पड़ता है। क्वींस स्कूल के आरपी सिंह ने कहा कि कोई बुक्स में कमीशन नहीं खाता।
इसी बीच आरटीओ कार्यालय में कार्यरत सुषमा चौधरी ने कहा कि मेरा बच्चा भी पब्लिक स्कूल में पढ़ता है, आज मेरा बच्चा सुबह डरा हुआ था, बोला कल स्कूल में पुलिस आई थी, आज स्कूल नहीं जाऊंगा। उन्होंने अपने बच्चे के डरने का आरोप परिषद कार्यकर्ताओं पर मढ़ दिया। इस पर विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता भड़क गए और महिला कर्मी पर स्कूलों की तरफदारी में आने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। इस प्रकरण पर भी कार्यकर्ता और स्कूल संचालक आमने-सामने आ गए। सिटी मजिस्ट्रेट ने फिर उन्हें शांत किया। शुरू से लेकर अंत तक हंगामा ही होता रहा। अंत में पीएसए के अध्यक्ष प्रवींद्र कुमार रौतेला ने कहा कि अभिभावकों को अपनी बात कहने की पूरी छूट है, उन्हें प्रधानाचार्य या प्रबंधन से मिलकर अपनी समस्या रखनी चाहिए, प्रत्येक स्कूल उनकी बात सुनेगा।
बैठक में एसडीएम पंकज उपाध्याय, सीओ राजेंद्र सिंह हयांकी, एआरटीओ गुरुदेव सिंह, नगर शिक्षा अधिकारी तारा चंद्र पनेरू, पब्लिक स्कूलों के पूर्व अध्यक्ष सुनील जोशी, निर्मला की सिस्टर जोएसी, सेंट थेरेसा के फादर जूलियन पिंटो, डान बास्को के प्रबंधक गोपाल बिष्ट, सेंट लारेंस की प्रधानाचार्या अनीता जोशी, जेडीएम की राधा ऐठानी, निमोनक स्कूल के कैलाश भगत, श्रीगुरुतेग बहादुर स्कूल के विजय जोशी, सेक्रेड हार्ट के दीपक पॉल, भुवन सिंह भाकुनी के अलावा विद्यार्थी परिषद के विरेंद्र सिंह बिष्ट, दीपक पांडे आदि मौजूद रहे।