नैनीताल में 90 साल से नंदा देवी महोत्सव करा रही संस्था राम सेवक सभा के सामने विकट स्थिति है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत शुक्रवार को करेंगे।
इधर मुख्यमंत्री मेले का उद्घाटन कर रहे होंगे और ठीक उसी समय हाईकोर्ट में मेले के आयोजन के संबंध में सुनवाई चल रही होगी। जिस संस्था के बुलावे पर मुख्यमंत्री आएंगे, हाईकोर्ट में मेले को लेकर उसी की भूमिका पर बहस चल रही होगी।
सभा ने मेले की तैयारियां दो माह पूर्व से प्रारंभ कर दी थीं। इसके तहत मुख्य रूप से फ्लैट्स में अस्थाई दुकानों के निर्माण सहित विभिन्न स्थानों पर गेट निर्माण तथा विद्युत लड़ियों से सजावट के टेंडर करने के बाद दुकानों का निर्माण शुरू कर दिया गया था।
दुकानों का निर्माण हर साल फ्लैट्स में किया जाता है, जो नगर पालिका की संपत्ति है। दुकानों की नीलामी रामसेवक सभा करती रही है और इससे प्राप्त राशि भी वही इस्तेमाल करती है। यह राशि अमूमन 25 से 35 लाख तक होती है।
हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर पालिका की भूमि पर दुकानों की नीलामी राम सेवक सभा द्वारा कराने पर सवाल उठाया। नगर पालिका ने निर्णय लिया कि नीलामी की राशि का 75 प्रतिशत पालिका का होगा।
बीते रोज हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पालिका की भूमि पर दुकान नीलामी का सभा को कोई अधिकार नही है। पालिक ही नीलामी कराए। राम सेवक सभा ने इस आदेश को स्पेशल अपील कर चुनौती दी जिस पर शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई होनी है।
सभा के अध्यक्ष पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी मंटू का कहना है कि यदि आज हाईकोर्ट का निर्णय बहाल रहा तो सभा इन दुकानों, गेट, विद्युत लड़ियों से की गई सजावट को हटा लेगी और केवल मंदिर परिसर के भीतर मूर्ति निर्माण व पूजा भंडारे तक अपनी भूमिका सीमित रखेगी।
सवाल यह है कि पालिका एक दिन के भीतर क्या नीलामी, निर्माण आदि की व्यवस्थाएं कर पाएगी। मंटू का कहना है कि सभा सीएम से दुकान निर्माण स्थल सभा को आवंटित करने की मांग करेगी।
सवाल यह है कि मुख्यमंत्री जिस सभा के निमंत्रण पर आए हैं उसकी सुनेंगे, अपने अधीन आने वाली संवैधानिक संस्था नगर पालिका के निर्णय को मानेंगे या हाईकोर्ट के निर्णय पर सामंजस्य बैठाएंगे।