गैंगों के बीच टकराव के बाद सिर्फ एक बदमाश कारतूसों के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ा है। अन्य बदमाश बेखौफ घूम रहे हैं। गोलियां चल रही हैं। दहशत का माहौल है। कई आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। सवाल पुलिस की भूमिका का है।
काठगोदाम पुलिस ने अपहरण और मारपीट की घटना के बाद एक हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार कर वाहवाही बटोरने की कोशिश की। बदमाश के कब्जे से आठ कारतूस भी बरामद करने का दावा किया गया। सवाल यह है कि चंद्रशेखर ने किसे मारने के लिए गोलियों का जखीरा रखा था क्योंकि इस मामले में अन्य आरोपी अब तक पकड़े नहीं गए हैं।
जरायम की दुनिया में काफी समय से चर्चित हृदयेश गैंग के गुर्गे रवि आर्या के घर पर फायरिंग के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया लेकिन इस मामले में अभी कार्रवाई नहीं हुई है। इधर हत्या के प्रयास के आरोपी वीरेंद्र बोरा के करीबी संकेत वर्मा ने हृदयेश और उसके गैंग के लोगों पर फायरिंग का आरोप लगाया है। इस मामले की भी जांच जारी होने की बात कही जा रही है।
पुलिस का कहना है कि दोनों गैंग के पास अवैध असलहे और कारतूस हैं। गैंग के आका अपने धंधों को चलाने के लिए अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आकाओं के पीछे रहने वालों ने प्रापर्टी, खनन और शराब के धंधे से बेशुमार कमाई की है।
ऐसे लोग मुकदमा दर्ज होते ही आंदोलन की चेतावनी देते हैं। बदमाशों की गोलियां कभी रिश्ते नहीं पहचानती है लेकिन आशंका है कि पुलिस कार्रवाई करने में रिश्तों का ख्याल ज्यादा कर रही है। इसी कारण जमीन पर एक्शन नहीं दिखाई दे रहा है। अभी तक किसी भी बदमाश ने सरेंडर नहीं किया है। खास बात यह है कि सभी नामजद हैं। अज्ञात में किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं लिखा गया है।
बदमाशों की कमर तोड़ने के लिए पुलिस तेजी से प्रयास कर रही है। बदमाशों के खिलाफ जिला बदर सहित अन्य कार्रवाई चल रही है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
जन्मेजय खंडूरी, एसएसपी