भवन तैयार हुए साढ़े सात साल हो गए लेकिन जिस उद्देश्य के लिए इसका निर्माण किया गया वह अब तक पूरा नहीं हो पाया है। बात हो रही है महिला अस्पताल के नए भवन की। बजट के अभाव में बचा हुआ काम पूरा नहीं हो पाया तो अब लागत भी दोगुनी हो गई।
महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग का निर्माण काम वर्ष 2009-10 में शुरू हुआ था। यह तीन करोड़ 54 लाख रुपये में पूरा किया जाना था। बजट न मिलने के कारण समयावधि बढ़ती गई और लागत भी। बिल्डिंग की लागत बढ़कर छह करोड़ 70 लाख रुपये पहुंच गई।
इसके बावजूद काम नहीं पूरा हुआ है। निर्माण पेयजल निगम रामनगर कर रहा है। प्रोजेक्ट मैनेजर मृदुला सिंह ने बताया कि अभी लिफ्ट का काम और एप्रोच रोड बनने का काम बाकी है। साथ ही शासन से कुछ बजट भी मिलना है।
बता दें कि महिला अस्पताल में अभी सिर्फ 30 बेड हैं। अस्पताल में आने वाले रोगियों की संख्या अधिक है। कई बार हालात ऐसे होते हैं कि डिलीवरी से पहले और बाद में एक बेड पर दो-दो महिलाएं होती हैं। बेड न होने की स्थिति में कई बार गर्भवती महिलाओं को सुशीला तिवारी भेजना पड़ता है।
दूसरी ओर महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. बी जोशी ने बताया कि नई बिल्डिंग के 10 डॉक्टर, 30 स्टाफ नर्स, वार्ड आया, रेडियोलॉजिस्ट, ओटी असिस्टेंट, टेक्नीशियन, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन समेत अन्य स्टाफ की जरूरत है। इसके लिए कई बार सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों को लिखा जा चुका है। बिना स्टाफ के काम करना मुश्किल हो जाएगा।