हल्द्वानी। मुख्यमंत्री हरीश रावत के वाहन पर शुक्रवार दोपहर हुए हमले के मामले में हल्द्वानी पुलिस को मुंह की खानी पड़ी है। कोर्ट ने मामले में पकड़े गए भाजयुमो जिलाध्यक्ष विकास भगत समेत पांचों कार्यकर्ताओं को तुरंत ही जमानत दे दी। कोर्ट ने साफ कहा कि वो सीएम पर जानलेवा हमला नहीं था। चूंकि गाड़ी में तोड़फोड़ का मुकदमा चालक की ओर से नहीं करवाया गया था, इसलिए इसे भी जमानत का एक आधार माना गया।
भाजयुमो जिलाध्यक्ष विकास भगत, नीरज बिष्ट, वरुण तिवारी, संजय परगाई और मुकेश जोशी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर लाडली के घर से निकल रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत की कार घेर ली थी। भीड़ में से किसी ने पत्थर मारकर कार का शीशा तोड़ दिया था। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। भगदड़ में कई लोग कीचड़ में गिर गए थे। बाद में विकास भगत समेत पांचों भाजयुमो कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ 307, 148, 147, 427, 353 और सेवेंथ क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया।
पांचों को शनिवार को एसीजेएम हल्द्वानी दीपाली शर्मा की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने जमानत पर सुनवाई के दौरान माना कि ये ऐसा कृत्य नहीं था, जिसमें किसी की जान जा सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने धारा 307 को खारिज कर पांचों को जमानत दे दी। आरोपियों की पैरवी अधिवक्ता बिंदेश गुप्ता, महनाज जहां और दिनेश मेहता ने की।