हल्द्वानी। रामनगर-काशीपुर रेलवे ट्रैक पर पिछले दिन मिली बाघिन की लाश के मामले की जांच शुरू हो गई है। वन विभाग बाघिन को कहीं और मारकर शव ठिकाने लगाने के लिए रेलवे ट्रैक पर फेंकने के मामले की भी जांच कर रहा है। हेमपुर का इलाका बाघों की कब्रगाह रहा है। दिसंबर 2013 में हेमपुर डिपो में बाघिन का फंदे में फंसाकर शिकार किया गया। मामले में हेमपुर के कमांडेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। 2012 में हेमपुर डिपो क्षेत्र में आग लगने से चार शावक जलकर मरे थे। शुरुआत में इस मामले के तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई थी। 2004 में भी बाघिन को गोली मार कर शिकार किया गया। ऐसे में बाघिन का फिर इसी इलाके में शव मिलने से खलबली मची हुई है। प्रथमदृष्टया ट्रेन से बाघिन के कटने की बात कही जा रही है, पर यह भी आशंका है कहीं बाघिन की जहर या फिर फंदे में फंसने से मौत तो नहीं हुई, इसके बाद साक्ष्य छिपाने के लिए रेलवे ट्रैक पर शव फेंक दिया गया हो। ऐसे में वन विभाग ने इन बिंदुओं पर जांच शुरू की है। 2010 में फांटो रेंज और इसी साल अप्रैल में गैबुआ में बाघ का शव मिला था, जिसे भी कहीं और मारकर फेंकने की बात सामने आई थी। डीएफओ राहुल का कहना है कि बाघिन को कहीं और मारकर यहां फेंका जा सकता है, यह हमारी जांच का अहम बिंदु है।
लालकुआं में हाथी की हुई थी मौत
करीब चार साल पहले तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत लालकुआं में सिमैप के करीब के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन ने हाथी को टक्कर मारी थी। लाख कोशिश के बाद भी घायल हाथी को बचाया नहीं जा सका। इसके बाद रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा, गश्त, ट्रैक के आसपास झाड़ी, पेड़ों को हटाने की बात कही गई, जिससे ड्राइवर आसानी से वन्यजीव को देख सकें, पर अब तक ऐसा नहीं हुआ।