नैनीताल। शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह पवार ने कहा कि नगर निकायों को सुदृढ़ करने के लिए शीघ्र ही एक्ट बनाया जाएगा। निकायों की आय में बढ़ोतरी के लिए भी होल्डिंग पॉलिसी लाई जाएगी। इससे पूर्व उन्होंने मंडल भर के निकाय अध्यक्षों की समस्याएं भी सुनीं। शहरी विकास विभाग की एक दिनी मंडलीय कार्यशाला में श्री पवार ने सभी निकाय प्रतिनिधियों से अपील की कि लैंड बैंक चिन्हित कर लें, जिससे भविष्य में किसी भी विकास योजना में भूमि संबंधी कोई अवरोध न हो। उन्होंने वन एवं राजस्व भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव डीएम के माध्यम से त्वरित भेजने को कहा। उन्होंने कहा कि सफाई अभियान में सहयोग के लिए शौचालय निर्माण के प्रस्ताव शासन को भेजें। स्थानीय निकाय रिन्यूवल प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिए। श्री पवार ने कहा कि सभी निकाय मास्टर प्लान के साथ परियोजना का चयन, भूमि को भी सुनिश्चित कर लें। शहरी विकास सचिव डीएस गर्व्याल ने कहा कि निकायों के वित्तीय प्रबंधन एवं आय में बढ़ोतरी के लिए कई प्रस्ताव बनाए जा रहे हैं, जिन्हें कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही लागू किया जाएगा। इससे पूर्व हल्द्वानी के मेयर जोगेंद्र रौतेला ने सिटी डेवलपमेंट के लिए प्रत्येक शहर का सिटी डेवलपमेंट प्लान बनाने, ड्रेनेज सिस्टम के साथ ट्रीटमेंट प्लांट लगाने समेत आकस्मिक निधि शीघ्र अवमुक्त करने की मांग की। नैनीताल पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण ने पर्यटक नगरी में पार्किंग समस्या निस्तारण की वकालत की। अल्मोड़ा पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी ने पालिकाओं की ओर से युटिलाइजेशन सर्टिफिकेट न देने पर 12वें वित्त का पैसा लैप्स होने का पक्ष रखते हुए पुनरावृत्ति रोकने की मांग की। रामनगर के मो. अक रम ने निकाय प्रतिनिधियों के हकहकूक की उपेक्षा का आरोप लगाया। अन्य पालिकाध्यक्षों ने भी संबंधित निकाय की समस्याओं को रखा। इस दौरान अपर निदेशक नवनीत पांडे, परियोजना निदेशक सूडा राजू पांडे, उप निदेशक सुभाष गुप्ता, मेयर उषा चौधरी, सोनी कोहली, पालिका व पंचायत अध्यक्ष मनमोहन सिंह, लछमी पांडे, कबीर शाही, नीमा बिष्ट, रीता रावल, मो. उमर, चंपा देवी, अंजू, मो.इस्लाम, महेंद्र, लता वर्मा, कवींद्र शाही, डीके शर्मा, निर्मला साह, के सिंह आदि थे। पालिकाध्यक्षों को दिए प्रबंधन के टिप्स
नैनीताल। कार्यशाला में निकाय प्रतिनिधियों को आडिट आफीसर राहुल झा और रवि पांडे समेत विषय विशेषज्ञों की ओर से वित्तीय प्रबंधन, दोहरी लेखा प्रणाली, आय बढ़ोतरी, निगम में प्रत्येक दो और निकाय एवं पंचायतों में परिसम्पत्तियों का पांच वर्ष में पुन:मूल्यांकन करने, किराए में बढ़ोतरी, निकाय भूमि का सदुपयोग आदि के बारे में जानकारी एवं आवश्यक टिप्स दिए गए।