नैनीताल। वर्ष 2008 में लालकुआं में हत्या के प्रयास के मामले में जिला जज ने अभियुक्त को 3 वर्ष कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि गैंगस्टर एक्ट में दो साल कैद में काटने के साथ पांच हजार रुपये जुर्माना देना होगा। दोनों सजाएं एकसाथ चलेंगी।
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया कि 12 जून 2008 को लालकुआं पेपर मिल में कार्यरत मनीष वशिष्ठ ने लालकुआं कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में लिखा कि उसी दिन अपराह्न 12.30 बजे वह अपने सहकर्मी चाचा योगेश्वर शर्मा, संजय सक्सेना, चंद्रमणि के साथ जा रहे थे। रास्ते में तलपुर बहेड़ी निवासी मुख्तार, मो. हसन खड़े थे। मुख्तार के इशारे पर हसन ने तमंचे से उन पर फायर कर दिया। योगेश्वर घायल हो गए।
इसके बाद हमलावर दोपहिया में सवार होकर अपने साथी तनवीर के साथ किच्छा रोड की ओर भागने लगे, लेकिन लालकुआं के तत्कालीन कोतवाल महेंद्र सिंह धौनी ने लोगों की मदद से हमलावर हसन को पकड़ लिया। जबकि अन्य फरार हो गए।
हसन के पास से दो तमंचे, जिंदा कारतूस, खोखे मिले। उसने हत्या के लिए 50 हजार रुपये की सुपारी लेने की बात कबूला। पुलिस ने बाद में मुख्तार को भी गिरफ्तार कर लिया। मामले की बुधवार को सुनवाई हुई। जिला जज ने मुख्तार को हत्या के प्रयास और गैंगस्टर में सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से 7 गवाह पेश किए गए। डीजीसी सुशील शर्मा, सहायक नरेंद्र नेगी ने मामले की पैरवी की।