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अफसरों के कारण मर रहे बाघ

Fri, 20 Dec 2013 05:49 AM IST
Nainital
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हल्द्वानी। जंगलात के अफसरों और नीतियों के कारण ही कथित तौर पर बाघ मर रहे हैं। बाघ समेत दूसरे वन्यजीवों की सुरक्षा को केंद्रीय वन मंत्रालय के दबाव में गौला कापर्स बना पर इसका एक भी ढेला खर्च नहीं हो सका। बार-बार एक अफसर के टेबिल से फाइल कुछ आपत्तियों के कारण लौट रही है। दूसरी योजनाएं भी फाइलों में कैद हैं।
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करीब तीन साल पहले गौला कापर्स बना, इसमें केंद्रीय वन मंत्रालय की शर्त के अनुसार वन निगम का खनन से प्राप्त होने वाला राजस्व जमा हो रहा है। इस राशि का इस्तेमाल बाघ की सुरक्षा के लिए होना है। इस समय छह करोड़ से ज्यादा की राशि कापर्स में है, पर यह राशि बाघ की सुरक्षा खर्च नहीं हो पा रही है। देहरादून में बार-बार प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है, पर एक बड़े अफसर के कार्यालय से फाइल हर बार कुछ न कुछ आपत्तियों के साथ लौट आती है। बार-बार ‘आपत्तियों’ के कारण कई तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म होने के साथ कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं जबकि केंद्रीय वन मंत्रालय को शर्तों का कितना पालन हुआ है, उसकी रिपोर्ट जनवरी में भेजनी है।
इसी तरह राज्य में केंद्र सरकार की तरह स्टेट वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को बनाया जाना था पर यह भी संस्था भी नहीं बन सकी। इसी तरह वन्यजीव अपराधियों से निपटने को एक स्पेशल बनाए जाने की बात हुई, जिसमें जंगलात और पुलिस के तेज तर्रार कर्मियों को शामिल किया जाना था, पर यह संस्था भी नहीं बन सकी है। स्थिति यह है कि चीफ इंटेलीजेंस का पद किसके पास है यह भी स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं ने शासन को पत्र तक लिखा है, जबकि हर बार बाघ के शिकार के बाद शासन और जंगलात के अफसर सुरक्षा बढ़ाने, योजनाओं को लागू करने की बात कहते हैं।
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