हल्द्वानी। एमबीपीजी कालेज में सृजन साहित्यिक संस्था की ओर से प्रख्यात उपन्यासकार इला चंद जोशी जयंती एवं हिंदी के प्रथम डी.लिट उपाधि से विभूषित डा. पीतांबर दत्त बडथ्वाल की जयंती पर काव्य संगोष्ठी हुई।
प्राचार्य डा. बीसी मेलकानी ने दीप प्रज्वलित कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण का दायित्व युवा पीढ़ी पर है। संगोष्ठी में छात्र शंकर ने ‘लुट रही बहनों की इज्जत, बिक गए, इसके रखवाले के बढ़ते महिला अपराध और व्यवस्था पर प्रहार किया। मनोज ने ‘मां मैं तो अभी तेरे कोख से जन्मी ही नहीं, फिर क्यों ये दुनिया मेरी दुश्मन बन गई, हमें बचाने वाले हाथ, हमारी हत्या को चल दिए जरिए भ्रूण हत्या की समस्या को लोगों को सामने रखा। विनीता ने ‘बचपन यादों में कैद हो गया, अभिजात कांडपाल निडर ने ‘युवा है तो वायु बन, जीत जा जीवन का रण, बेशक जोश से तू काम कर, स्वविवेक का भी तो ध्यान रख के जरिए युवाओं को संदेश दिया। संगोष्ठी में खीमा नंद बिनवाल, सुरेंद्र सिंह, शिवांगी, अंकित त्रिपाठी, हेम पलडिया, लवी सिंह, ईला जोशी, दिलीप वार्ष्णेय, बबली, घनश्याम, कंचन, ललित आदि ने काव्यपाठ किया। इससे पूर्व डा. संतोष मिश्रा, डा. कैलाश, डा. बीना मथेला एवं गंगा सिंह रावत डा. पीतांबर दत्त बडथ्वाल, इलाचंद जोशी के व्यक्तित्व और जीवनवृत्त पर प्रकाश डाला। इस दौरान दिनेश, निपुण बिष्ट, मोहित, लोकेश, दीपक, विवेक, शंकर, हरिप्रिया, अलंकृता सिंह, देवेंद्र रौतेला आदि मौजूद थे।