भीमताल। वर्षों पुरानी एक्वामाल फैक्ट्री प्रबंधन ने यहां स्थित अपने एक प्लांट को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है। श्रमिक असंतोष न हो इसके लिए कर्मचारियों से वार्ता के लिए मुंबई से उच्च प्रबंधन के दो अधिकारी भी यहां पहुंचे हैं, जिन्होंने शुक्रवार को प्लांट के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की और प्लांट को बंद करने संबंधी संकेत दिए। तभी से प्लांट के 50 से अधिक कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
वर्ष 1989 में औद्योगिक घाटी में एपिक इंडिया लिमिटेड के नाम से वाटर फिल्टर बनाने वाली फैक्ट्री की स्थापना हुई थी। बाद के वर्षों में इसे एक्वामाल का नाम दे दिया गया और मेहरागांव स्थित वैक्यूम क्लीनर बनाने वाली फैक्ट्री यूरेका फोर्ब्स को भी एक्वामाल परिसर में ही शिफ्ट कर दिया गया। वर्तमान में एक्वामाल परिसर में दो प्लांट हैं, जिन्हें एक्वामाल-वन और एक्वामाल-टू के नाम से जाना जाता है।
सूत्र बताते हैं कि वर्षों पुराना प्लांट होने के कारण एक्वामाल-वन को कोई सब्सिडी नहीं मिलती है, जबकि एक्वामाल-टू को सब्सिडी मिलती है। यही कारण है कि कंपनी एक्वामाल-वन को बंद करने की तैयारी में हैं। कुछ माह पहले ही कंपनी इस प्लांट के दर्जनों श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। इस प्लांट में वर्षों से लगभग 72 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं।
प्लांट को बंद करने से पहले प्रबंधन कर्मचारियों से रायशुमारी करना चाहता है, ताकि किसी तरह का श्रमिक असंतोष पैदा न हो। इसके लिए शुक्रवार को मुंबई से आए दो अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ बातचीत की और प्लांट बंद होने की स्थिति में भविष्य के लिए कुछ विकल्प सामने रखे, जिसमें अन्य यूनिटों में तबादला मुख्य था। कर्मचारियों ने फिलहाल अन्य यूनिटों में जाने से मना कर दिया और स्थानीय स्तर पर ही कुछ नया काम शुरू कराने की मांग की। इस मामले में अब सोमवार को फिर से बैठक होगी। वहीं, इस बाबत फैक्ट्री के स्थानीय प्रबंधक पीसी राय से उनके फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।