हल्द्वानी। पुलिस विभाग में सरकारी मकानों का बुरा हाल है, जिनको अलॉट हुए उन्होंने अपनी निजी संपत्ति समझकर कब्जा ही कर लिया। कोतवाली के कई आवासों पर लंबे समय से पुलिसकर्मियों का कब्जा है। वे यहां रहते नहीं है, मगर सामान पड़ा है, जबकि दो आवासों पर असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (एपीओ) बिना परमिशन के काबिज हैं। ऐसे में शहर कोतवाल को रहने के लिए सरकारी आवास नहीं मिल पा रहा है, जबकि बाकी कई दरोगा भी किराए पर रह रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कोतवाली परिसर मेें करीब पांच सरकारी मकानों पर अवैध कब्जे हैं। कुछ में तो ऐसे पुलिसकर्मियों के ताले लगे हैं, जिनका ट्रांसफर दूसरे जनपदों में हो गया। कुछ ऐसे आवासों पर सिपाही काबिज हैं जो नियमत: दरोगाओं को अलाट होने चाहिए। इसी तरह दो मकानों में एपीओ काबिज हैं, जबकि उन्हें इसके लिए विभाग से परमिशन लेनी चाहिए। इसके अलावा कुछ ऐसे पुलिसकर्मी हैं, जो कुछ बड़े अधिकारियों के करीबी हैं तो वो भी सरकारी आवासों में कब्जा किए बैठे हैं। हालांकि, उनके अपने मकान किराए पर चल रहे हैं। हैरानी की बात है कि शहर कोतवाल कुलदीप असवाल को 15 दिन से ज्यादा का समय हल्द्वानी कोतवाली आए हो गया, मगर अब तक वे होटल में रह रहे हैं। सरकारी आवास उनके लिए खाली नहीं है।
शिकायत की गई है
अन्य जनपद में रहने वाले सिपाहियों की शिकायत उनके पुलिस अधीक्षकों और एपीओ की डीजी प्रॉसिक्यूशन से की गई है। इसके अलावा कई अन्य को मकान खाली करवाने को नोटिस दिए गए हैं। आगे उन पर कार्रवाई होगी। -डा. सदानंद दाते, एसएसपी