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ग्रामीण क्षेत्रों में खत्म होने के कगार पर शिमला आलू का बीज

Thu, 18 Apr 2013 05:30 AM IST
Nainital
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भीमताल/धानाचूली। चांफी, पदमपुरी, धारी, दड़माने, पोखराड़, कौल, धानाचूली, मनाघेर, राता, खुटियाखाल, क्वैदल के अलावा रामगढ़ और ओखलकांडा ब्लाक के गांवों में कुछ साल पहले तक शिमला आलू का ही उत्पादन होता था जिसकी बाजार में अच्छी मांग थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से काश्तकारों को सरकारी स्तर पर शिमला आलू बीज के बजाए गौला आलू की विभिन्न प्रजातियों के बीज मिल रहे हैं। काश्तकार अपने घर पर बीच तैयार करते थे लेकिन पिछले सीजन में बोया गया शिमला आलू बीज दैवीय आपदा की भेंट चढ़ गया। अब स्थानीय स्तर पर काश्तकारों के पास शिमला आलू बीज नहीं है।
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बुजुर्ग काश्तकार नैन सिंह बताते हैं कि वर्षों पहले उनके पूर्वजों ने शिमला से शिमला आलू के बीच को मंगाया था लेकिन अब यहां अधिकतर गौला आलू का उत्पादन हो रहा है। काश्तकार कुंदन सिंह और सहकारी समिति के अध्यक्ष चंदन सिंह का कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर काश्तकारों को पाली हाउस उपलब्ध कराए जाएं और समय समय पर मृदा परीक्षण हो तो शिमला आलू के बीच को फिर से तैयार किया जा सकता है। दड़माने गांव के काश्तकार गोपाल बिष्ट कहते हैं कि उद्यान विभाग ने आज तक शिमला आलू के बीच को बचाने के लिए कोई काम नहीं किया है।
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