हल्द्वानी। प्रदेश के एकमात्र राजकीय महिला महाविद्यालय में उच्चशिक्षा निदेशालय चलने की वजह से इस महाविद्यालय के विकास के रास्ते नहीं खुल पा रहे हैं। महाविद्यालय के एक ब्लाक पर निदेशालय का सालों से कब्जा बना हुआ है। इस वजह से न तो अब तक नये विषय ही खुल सके हैं और न ही इस महाविद्यालय को स्नातकोत्तर (पीजी) का दर्जा ही मिल सका है। इससे छात्राओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बता दें कि 15 वर्ष पूर्व यहां राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसमें स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई कराए जाने की व्यवस्था है। पिछले कई सालों से इस महाविद्यालय को पीजी किए जाने की मांग हो रही है, इसका प्रस्ताव उच्चशिक्षा निदेशालय से गया भी मगर शासन में जाकर अटक गया। कई जनप्रतिनिधि भी छात्राओं की इस मांग का कई बाद समर्थन कर पीजी विषय चालू कराए जाने का भरोसा दे चुके हैं लेकिन हुआ आज तक कुछ नहीं। शासन की उपेक्षा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला कालेज होने के बावजूद इस डिग्री कालेज में छात्राओं का पसंदीदा संगीत विषय तक नहीं है। वाणिज्य, समाजशास्त्र, गणित समेत कई विषयों में प्राध्यापकों के पद रिक्त होने के बावजूद नियमित तैनाती करने के बजाय संविदा शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। इस हाल में छात्राओं की पढ़ाई कैसे होगी, इसका अंदाजा खुद लगाया जा सकता है। इसके अलावा महिला कालेज को पीजी की मान्यता मिलने में सबसे बड़ा रोड़ा उच्चशिक्षा निदेशालय के दफ्तर को माना जा रहा है। कालेज के एक ब्लाक में उच्चशिक्षा निदेशालय चल रहा है। पीजी होने पर क्लासरूमों की जरूरत पड़ेगी जिसके लिए उच्चशिक्षा निदेशालय से परिसर खाली कराना पड़ेगा।
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कालेज में स्नातक स्तर पर संगीत और इतिहास समेत नये विषय खोलने के बारे में नये सिरे से उच्चशिक्षा निदेशालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस संबंध में पहले भी प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर तैनाती शीघ्र करने का उच्चशिक्षा निदेशक भरोसा दिया है। महाविद्यालय को स्नातकोत्तर किए जाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है।
डा. जीएस बिष्ट, प्राचार्य, राजकीय महिला कालेज
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उच्चशिक्षा निदेशालय भवन के लिए गौलापार में भूमि मिल चुकी है। भवन निर्माण को 470 लाख का बजट भी शासन से स्वीकृत हो गया है। शासन ने निदेशालय भवन को अब पांच मंजिल के स्थान पर तीन मंजिल बनाने के निर्देश दिए हैं, इसका नया मानचित्र तैयार हो रहा है। इसके बाद जल्द निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। निदेशालय भवन बनने के उपरांत महिला महाविद्यालय को खाली कर दिया जाएगा।
डा. मुकुल पंत, प्रभारी निदेशक, उच्चशिक्षा निदेशालय