हल्द्वानी। शहर से अवैध कब्जे हटाने का जिम्मा संभाले नगर निगम के कर्मचारी आवासों पर ही कब्जे हो गए हैं। लेकिन निगम के अधिकारियों ने आवासों को खाली कराने के लिए अब तक कोई सुध नहीं ली। कई कर्मचारी तो सेवानिवृत्त होने के बाद निगम को किराया तक नहीं दे रहे हैं।
मालूम हो कि राज्य गठन से पूर्व नगर पालिका द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर पालिका की भूमि पर 85 आवासों का निर्माण करवाया था। इनमें से 65 आवास सफाई कर्मियों के बनवाए गए। जबकि सामान्य कर्मियों के अलग - अलग स्थानों पर करीब 21 आवास बने हैं। सूत्रों के मुताबिक सफाई कर्मियों के रानीबाग में दो आवास हैं जिनमें से एक खाली है जबकि काठगोदाम में 13 में से 3 आवासों पर अवैध कब्जा है। इसी तरह कुल्यालपुरा में छह में से दो आवासों पर अवैध कब्जा है, टनकपुर रोड पर स्थित 16 आवासों की कालोनी में से 3 पर अवैध रूप से लोग काबिज हैं जबकि गांधी नगर कालोनी में 28 आवासों में से छह पर अवैध कब्जा है। इसके अलावा सामान्य कर्मचारियों के भी 21 आवासों में से केवल 17 कर्मचारियों का एचआरए कटता है। बताते हैं कि सामान्य कर्मचारियों के भी कई आवासों पर अवैध कब्जे हैं। अवैध रूप से काबिज लोगों में अधिकांश ऐसे हैं जो कि काफी समय पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फिर उनकी आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके परिजन रह रहे हैं।
नगर निगम के शहर में कहां-कहां आवास हैं और उनकी क्या स्थिति है, इसका पता अधिकारियों तक को नहीं था। इसका खुलासा तब हुआ कि जब अपर मुख्य नगर अधिकारी बीएस चलाल ने संपत्ति रजिस्टर तैयार करने के बारे में बैठक ली। निगम प्रशासन ने करीब डेढ़ दर्जन आवासों पर अवैध कब्जे की जानकारी मिलने के बावजूद अब तक इन्हें खाली कराने के लिए ठोस कार्यवाही नहीं की। अपर मुख्य नगर अधिकारी से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल फोन नहीं उठ सका।