हल्द्वानी। अत्याधुनिक हथियारों से लैस शिकारियों से लड़ने के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त गोलियां तक नहीं है। गिनी चुनी गोलियां ही जंगलात के पास बची है। जंगल की सुरक्षा के हाल बेहद खराब है। रेंजों से गोली मांगी जा रही है लेकिन अधिकारी कर्मचारियों को आश्वासन और हिम्मत का पाठ पढ़ा रहे हैं।
जंगल और वन महकमे की ऊपर से भले स्थिति सामान्य लगे, लेकिन अंदर के हालात बेहद खराब हैं। पूरे कुमाऊं में जंगल की सुरक्षा के लिए केवल 277 असलहे हैं। इसमें भी तराई के जंगलों (तराई पूर्वी, तराई पश्चिम, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी, रामनगर डिविजन) में शिकारियों और तस्करों की घुसपैठ को देखते हुए सबसे ज्यादा असलहा 249 दिये गये हैं। बाकी प्रभागों में 28 असलहे दिये गये। पर यह असलहे भी केवल दिखावे भर के हैं, प्रभागों के पास शिकारियों और तस्करों के हमले का जवाब देने को पर्याप्त गोली तक नहीं बची है। सभी प्रभागों से 12 बोर, 315 असलहे के लिए गोली की डिमांड भेजी गई है, पर वन कर्मियों को गोली नहीं मिल पा रही है। सबसे संवेदनशील प्रभाग तराई पश्चिम वन प्रभाग से दो हजार गोली की डिमांड है, पर यह गोली कब मिलेगी, इसका सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। इसी तरह तराई पूर्वी में भी गोली का कोटा खत्म हो चुका है। चार रेंज से 500 गोली की तत्काल देने डिमांड भेजी गई, तो अधिकारी मुश्किल से 25 गोली का जुगाड़ जैसे-तैसे कर सकें हैं। यहां से भी करीब डेढ़ हजार गोली की डिमांड है। रामनगर डिविजन में करीब दो साल से गोली खरीदी ही नहीं गई है। पर इस मामले में डीएफओ स्तर के अधिकारी सुरक्षा की बात कहते हुए खुलकर कुछ भी बोलना तक नहीं चाहते हैं। सभी को केंद्र सरकार के मिलने वाले कैंपा बजट का इंतजार है, जिससे गोली खरीदी जायेगी। तराई पश्चिम प्रभाग के डीएफओ निशांत वर्मा कहते हैं कि गोली खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जल्द ही कमी दूर कर ली जाएगी। हमारे पास अभी पर्याप्त संसाधन है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं परमजीत सिंह कहते हैं कि बाघ, तेंदुओं को बेहोश करने के लिए ट्रंकोलाइजर गन डाट की कमी नहीं है, पर असलहों की गोली निश्चित तौर पर बेहद कम है। गौला कार्पस बना है, उससे तक से पैसा नहीं मिला है। इससे मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। पेट्रोल को लेकर भी दिक्कत है।
जल्द कमी होगी दूर: पीसीसीएफ
हल्द्वानी। पीसीसीएफ डा. आरबीएस रावत का कहना है कि विभाग के पास पैसे की कमी है। हड़ताल आदि के चलते शासन से बजट जारी नहीं हो पाया है। बहरहाल, नवंबर में कैंपा और शासन दोनों से बजट मिल जाएगा।