हल्द्वानी। टाटा सफारी, महेंद्रा स्कॉर्पियो, आल्टो, मारुति-800। हर गाड़ी लाखों रुपये की। मगर वारिस कोई नहीं। सालों से एक ही जगह खड़ी गाड़ियों में धूल की चादर और जंक के साथ टूटफूट अलग से। कोई खुले आसमान के नीचे पड़ी है तो कोई एक विशाल हाल के अंधेरे कोनों में। कौन है इन गाड़ियों का मालिक और ये आई कहां से? यह किसी को नहीं मालूम।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के शॉपिंग कांप्लेक्स के बेसमेंट में लाखों रुपये की महेंद्रा स्कार्पियो छह माह से खड़ी है। यूपी नंबर की इस गाड़ी की कोई रसीद तक नहीं कटी है। बेसमेंट तक यह कैसे पहुंच गई यह सवाल अब भी निगम के लिए सवाल ही है। ठीक ऐसे ही उत्तराखंड नंबर की मारुती-800 दो वर्ष बेसमेंट की धूल खा रही है। धूल की परत इतनी मोटी कि गाड़ी की पहचान ही नहीं हो पाएगी। इस गाड़ी की भी कोई खैरखबर लेने नहीं आया। काले रंग की उत्तराखंड नंबर की ही एक आल्टो कार पार्किंग हाल के अंतिम और अंधेरे छोर पर खड़ी है। यह तो रही बेसमेंट की बात।
अब बाहर की पार्किंग में खड़ी गाड़ियों का हाल। चार वर्ष से हरे रंग की टाटा सफारी का सुधलेवा कोई नहीं। एक पेड़ की आड़ से सटी इस गाड़ी के दरवाजे के शीशे और नंबर प्लेट टूट चुकी हैं। इसी के बगल में खड़ी आल्टो कार के हाल भी बिलकुल सफारी की तरह ही हैं। ये किस राज्य की गाड़ी है इसका अतापता ही नहीं। चौपहिया वाहनों के साथ पार्किंग शुल्क कक्ष के ठीक पिछले हिस्से में दो वर्षों से एक बिना नंबर की स्प्लेंडर बाइक अपने वारिस की प्रतीक्षा में जंक खा गई है। सबसे दिलचस्पत बात यह है कि लावारिस गाड़ियां रात में लाकर पार्किंग में लगाई गई और उसके बाद कोई इन्हें लेने नहीं आया। इससे सवाल उठता है कि कहीं वाहन चोरी के तो नहीं? कुमाऊं मंडल विकास निगम पुलिस को कई बार गाड़ियां अपने सुपुर्द लेने के लिए लिख चुका है, मगर अब तक एक भी गाड़ी अपनी जगह से नहीं हटी।
रात में पूरी पार्किंग ही लावारिस
कुमाऊं मंडल विकास निगम के बेसमेंट में करीब 250 गाड़ियों को पार्क करने की क्षमता है। जबकि बाहर कम से कम 50 गाड़ियां खड़ी हो सकती हैं। लंबे समय के लिए गाड़ी पार्क करने वाले लोगों के लिए हालांकि पास की व्यवस्था की गई है। लेकिन बड़ी खामी यह है कि रात में पार्किंग की देखरेख के लिए कोई नहीं रहता। इसीलिए लावारिस गाड़ियों के मालिक का नाम-पता भी निगम को पता नहीं है।