हल्द्वानी। प्रदेश सरकार रामपुर से काठगोदाम तक हाइवे बना रही सद्भाव कंपनी पर मेहरबान हो गई है। शासन ने वन विकास निगम के अफसरों को कंपनी के लिए एक गेट आरक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
गुजरात की सद्भाव कंपनी रामपुर से काठगोदाम हाइवे बना रही है। कंपनी को सड़क निर्माण में उपखनिज की जरूरत है। शासन ने कंपनी पर मेहरबानी कर दी है। प्रमुख सचिव गृह आनंदवर्द्धन ने वन निगम को निर्देश दिए हैं कि नदी में एक गेट कंपनी के लिए ही आरक्षित किया जाए। कंपनी इस गेट से नौ लाख घनमीटर उपखनिज निकासी करेगी। इसको लेकर वन निगम के अफसर परेशान हैं। वाहन स्वामियों ने भी इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया है। उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंप, उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। निगम के आरएम एमपीएस रावत ने बताया कि शासन से आदेश मिले हैं। यह गेट कहां और कैसे होगा, इस पर मंथन किया जा रहा है।
ये हैं मुश्किलें
- कंपनी को किसी तरह अगर गौला नदी में एक गेट आरक्षित किया जाता है तो उक्त गेट के सैकड़ों वाहन स्वामियों को कहां समायोजित किया जाएगा।
- बारिश कम होने से नदी में उप खनिज कम है। ऐसे में नया गेट खोला गया तो अन्य गेट पर वाहन स्वामी प्रभावित होंगे, जो पहले से ही विरोध कर रहे हैं।
- वाहन स्वामियों का कहना है कि एक अक्तूबर से खनन सत्र शुरू नहीं हुआ है यदि नौ लाख घनमीटर कंपनी को दे दिया गया तो कम फेरे मिलेंगे। इसका नुकसान उन्हीं को होगा।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
वाहन स्वामियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर सद्भाव को गेट देने का विरोध किया है। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मनमानी बंद नहीं की तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में पम्मी सैफी, अरशद अय्यूब, मनोज मठपाल, पृथ्वी पाठक, संजय बोरा, चांद, इंद्र बिष्ट, हाजी शाकिर आदि थे।