हल्द्वानी। हाल ही में उच्चशिक्षा प्रभारी निदेशक पद से सेवानिवृत्त डॉ. सविता मोहन का कहना है कि एमबीपीजी कॉलेज की अधिकांश समस्याओं की जड़ अत्यधिक छात्र संख्या का होना है। उन्होंने पांच माह के अपने अनुभव को साझा करते हुए अमर उजाला से बातचीत में कहा कि एमबी कॉलेज में छात्र संख्या पर नियंत्रण तभी हो सकता है कि जब महिला महाविद्यालय को भी कोएड बना दिया जाए। इस प्रस्ताव को उच्चशिक्षा मंत्री भी पर मंथन कर रहे हैं।
उच्चशिक्षा निदेशालय में डॉ. सविता ने शुक्रवार को बताया कि एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संख्या पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। वहीं, राजकीय महिला महाविद्यालय पीजी होने के बावजूद छात्राओं की संख्या एक हजार से ऊपर नहीं हो पाती। इसकी वजह छात्राओं की पसंद भी एमबी कॉलेज ही रहता है। उन्होंने कहा कि जब महिला कॉलेज कोएड हो जाएगा तो वहां भी दाखिला लेने वालों की भीड़ बढ़ जाएगी। लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय में और विषय खोलने के साथ ही महिला महाविद्यालय में भी नये विषय शुरू करने के विषय पर उच्चशिक्षा मंत्री भी काफी गंभीर हैं। इसके साथ ही हल्द्वानी के गौलापार में भी एक नया राजकीय महाविद्यालय खोलने की जरूरत है, इस पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है।गौलापार और चोरगलिया केविद्यार्थियों को जब वहीं दाखिला मिल जाएगा तो एमबी में स्वयं भीड़ कम हो जाएगी। सेवानिवृत्त प्रभारी निदेशक ने उच्चशिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए नियमित उपस्थिति का नियम कड़ाई से लागू करने का भी सुझाव दिया है।
एमबीपीजी कॉलेज में छात्र संख्या नियंत्रण को सेवानिवृत्त प्रभारी उच्चशिक्षा निदेशक ने दिया सुझाव
हल्द्वानी में एक और महाविद्यालय खोलने पर चल रहा विचार